बांग्लादेश की संसद में उस समय माहौल गर्म हो गया जब BNP सांसद फजलुर रहमान ने हिंदू समुदाय की सुरक्षा और कट्टरपंथियों की गतिविधियों पर खुलकर सवाल उठाए. उन्होंने संसद के भीतर ऐसा भाषण दिया, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है. रहमान ने साफ कहा कि किसी भी नागरिक को सिर्फ उसके धर्म की वजह से निशाना बनाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
अपने भाषण में उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो सड़कों पर उतरकर "राम मंदिर नहीं चाहिए" और "हिंदू देश छोड़ो" जैसे नारे लगा रहे हैं. उन्होंने कहा, "ऐसे लोगों को देखकर ही समझ में आ जाता है कि वे कौन हैं. उनकी संख्या बढ़ती जा रही है और वे किसी की सुनना नहीं चाहते. उनका मकसद सिर्फ धर्म के नाम पर राजनीति और कारोबार करना है."
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बीएनपी के मंत्री ने सरकार और गृह मंत्री से कहा कि अगर सरकार को लगता है कि किसी मंदिर का निर्माण उचित नहीं है तो वह कानून के तहत फैसला ले सकती है. लेकिन अगर मंदिर बनाने की अनुमति है, तो फिर किसी को भी हिंसा या धमकी देकर उसे रोकने का अधिकार नहीं है.
फजलुर रहमान ने कहा, "मैं खुद एक मुसलमान हूं. मुझे इससे कोई परेशानी नहीं कि हिंदू अपने मंदिर में पूजा करें और मैं अपनी मस्जिद में नमाज पढ़ूं. इसमें आखिर दिक्कत क्या है?"
BNP सांसद ने मंदिरों और हिंदू संपत्तियों पर होने वाले हमलों की भी कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो.
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रहमान के भाषण के दौरान संसद में मौजूद BNP सांसदों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया. उनके बयान को अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के पक्ष में एक मजबूत आवाज के रूप में देखा जा रहा है.
हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर लगातार बहस होती रही है. ऐसे माहौल में संसद के भीतर फजलुर रहमान का यह भाषण राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर अहम माना जा रहा है. उन्होंने सरकार से अपील की कि कानून का राज कायम रखा जाए और धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.