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नाम- सती राजवंशी, उम्र 55 साल, हिंदू... इंडिया-बांग्लादेश बॉर्डर पर जीरो लाइन पर फंसा शख्स है कौन?

मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर नो मैन्स लैंड में कई घंटों तक फंसे रहे बांग्लादेशी नागरिक सती राजबंशी को आखिरकार पहचान सत्यापन के बाद उनके परिवार को सौंप दिया गया. पता चला कि वह बांग्लादेशी नागरिक ही हैं और हिंदू समुदाय से हैं. बांग्लादेशी बल ने जबरदस्ती उन्हें भारत में धकेलने की कोशिश की थी.

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सती राजबंशी हिंदू समुदाय से हैं और बांग्लादेशी नागरिक हैं. (Photo- ITG)
सती राजबंशी हिंदू समुदाय से हैं और बांग्लादेशी नागरिक हैं. (Photo- ITG)

भारत और बांग्लादेश की सीमा पर मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले में एक अनोखा मामला सामने आया. यहां एक बांग्लादेशी नागरिक कई घंटों तक नो मैन्स लैंड में फंसा रहा. आखिरकार पहचान की पुष्टि होने के बाद 11 जून को उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया गया है. अब पता चला कि वह हिंदू समुदाय से हैं और बांग्लादेशी बल ने जानबूझकर उन्हें भारत में भेजने की कोशिश की थी.

यह पूरा मामला सती राजबंशी नाम के 55 वर्षीय हिंदू शख्स से जुड़ा है. सती राजबंशी बांग्लादेश के राजशाही जिले के गुडागाड़ी थाना क्षेत्र स्थित चलना गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम स्वर्गीय बाघबत्ता राजबंशी बताया जा रहा है. BSF के मुताबिक, वह बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें मेघालय के महेंद्रगंज के पास नंदिरचार सेक्टर में पकड़ा गया.

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भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने दावा किया कि नियमों के मुताबिक कार्रवाई करते हुए उन्हें वापस बांग्लादेश की तरफ भेजा गया था. हालांकि, इस दौरान बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इसके बाद सती राजबंशी दोनों देशों की सीमा के बीच स्थित नो मैन्स लैंड में फंस गए.

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BSF और BGB के बीच सती राजबंशी को लेकर तनाव

हालात उस समय और ज्यादा खराब हो गए जब BSF और BGB के अधिकारियों के बीच उनकी पहचान और नागरिकता को लेकर विवाद शुरू हो गया. दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग भी हुई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई समाधान नहीं निकल सका. नतीजतन सती राजबंशी को पूरी रात सीमा क्षेत्र में ही रहना पड़ा.

इस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर दोनों देशों के जवानों के बीच बहस और सती राजबंशी के फंसे होने की तस्वीरें दिखाई गईं. हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

बांग्लादेशी नागरिक हैं सती राजबंशी

BSF का कहना था कि सती राजबंशी पूरी तरह बांग्लादेशी नागरिक हैं और उन्हें राजशाही स्थित उनके गांव से ही लाया गया था. BSF अधिकारियों ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया, जिनमें उन्हें दिव्यांग बताया गया था. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के दावे पूरी तरह गलत हैं. BSF ने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने खुद सती राजबंशी को पकड़कर भारतीय सीमा में धकेलने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया.

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परिवार ने दिखाया कागज और ले गए अपने साथ

आखिरकार गुरुवार सुबह तनाव खत्म हुआ, जब सती राजबंशी के परिजन आवश्यक दस्तावेजों के साथ मौके पर पहुंचे. दस्तावेजों की जांच और पहचान सत्यापन के बाद अधिकारियों ने उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया. यह घटना ऐसे समय में सामने आई जब भारत की पूर्वी सीमाओं पर अवैध घुसपैठ और गैर-दस्तावेजी प्रवासियों को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है. पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रख रही हैं और अवैध रूप से भारत में घुसपैठ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं.

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