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बांग्लादेश की इस्लामी जमात ने खोला भारत के खिलाफ मोर्चा! सीमा पर बढ़ा तनाव

बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी और 11 विपक्षी दलों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर 12 जून को विरोध रैलियों और 15 जून को ढाका में बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है. ये दल भारत पर लोगों को जबरन सीमा पार भेजने और सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की मौत का आरोप लगा रहे हैं.

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बांग्लादेश की विपक्षी पार्टियों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है (Photo: Jamaat/FB)
बांग्लादेश की विपक्षी पार्टियों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है (Photo: Jamaat/FB)

बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी और उसके साथ जुड़े 11 विपक्षी दलों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. इस गठबंधन में शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी शामिल है. इन दलों का आरोप है कि भारत लोगों को जबरन सीमा पार भेज रहा है और सीमा के पास बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो रही है. इस विरोध कार्यक्रम की घोषणा जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान की ओर से की गई.

गठबंधन ने कहा है कि 12 जून को बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों और प्रमुख सीमा चौकियों पर विरोध रैलियां होंगी. इसके बाद 15 जून को राजधानी ढाका में बड़ी रैली और जुलूस निकाला जाएगा.

गठबंधन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि भारत लोगों को जबरन सीमा पार भेजने की कोशिश कर रहा है. साथ ही यह भी दावा किया कि भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गोलीबारी में बांग्लादेशी नागरिक मारे गए हैं.

'पुश-इन' का मुद्दा बना बड़ा विवाद

भारतीय सीमा की ओर मार्च का ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब कथित 'पुश-इन' का मुद्दा बांग्लादेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. 'पुश-इन' से मतलब बांग्लादेश के उस आरोप से है कि भारत लोगों को जबरन सीमा पार बांग्लादेश भेज रहा है.

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रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में नई दिल्ली में हुई BSF और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की महानिदेशक स्तर की बैठक से पहले ढाका ने भी यह मुद्दा उठाया था.

हालांकि, भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है. भारत का कहना है कि वो किसी को जबरन सीमा पार नहीं भेज रहा, बल्कि केवल अवैध विदेशी नागरिकों को तय कानूनी प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच बनी व्यवस्था के तहत वेरिफिकेशन के बाद उनके देश वापस भेज रहा है.

अब बांग्लादेश के इस्लामवादी दल इस मुद्दे को सिर्फ सरकारी बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे सड़क पर भी ले जाने की तैयारी कर रहे हैं.

जमात ने पूर्व सांसद एएचएम हमीदुर रहमान आजाद के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा कि 12 जून को सीमा के पास वाले जिलों में विरोध प्रदर्शन होंगे और 15 जून को ढाका में विरोध सभा और जुलूस निकाला जाएगा.

इसी महीने की शुरुआत में आजाद ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद के सीमा संबंधी बयानों की तुलना भारतीय मंत्रियों के बयानों से की थी. उनका कहना था कि सरकार भारत के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रही है.

मई में पश्चिम बंगाल, असम में बीजेपी की जीत और भारत के अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने पर जोर दिए जाने के बाद बांग्लादेश ने अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी थी.

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11 दलों का यह गठबंधन बांग्लादेश के 12 फरवरी के आम चुनाव से पहले बनाया गया था. इसका नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी कर रही है, जो अब देश के प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल है. इसमें बांग्लादेश खेलाफत मजलिस, खेलाफत मजलिस, बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन और निजाम-ए-इस्लाम पार्टी जैसे कई इस्लामवादी दल भी शामिल हैं.

भारत सीमा के पास प्रदर्शन का ऐलान

बुधवार को ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के सेंट्रल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई. गठबंधन के समन्वयक और जमात-ए-इस्लामी के सहायक महासचिव एएचएम हमीदुर रहमान आजाद ने कहा कि 12 जून को सभी सीमावर्ती जिलों और प्रमुख सीमा चौकियों पर रैलियां होंगी. इसके बाद 15 जून को राजधानी ढाका में बड़ा विरोध प्रदर्शन और जुलूस निकाला जाएगा.

जमात के अलावा इस गठबंधन में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), बांग्लादेश खेलाफत मजलिस, खेलाफत मजलिस, आमार बांग्लादेश पार्टी, जातीय गणतांत्रिक पार्टी समेत कई विपक्षी दल शामिल हैं.

गठबंधन ने यह भी कहा कि अभियान के तहत अलग-अलग जिलों में सेमिनार और ढाका में एक राउंडटेबल चर्चा भी आयोजित की जाएगी.

NCP ने लोगों से 'मानव ढाल' बनने की अपील की

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में NCP के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी ने कहा कि जीरो लाइन के पास रहने वाले लोग मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि कथित 'पुश-इन' रोकने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को और मजबूत किया जाना चाहिए. साथ ही सीमावर्ती इलाकों के लोगों से अपील की कि वे 'मानव ढाल' बनें, ताकि आतंकवादी, तस्कर या अपराधी बांग्लादेश में प्रवेश न कर सकें.

तीन महीनों में 50 से ज्यादा 'पुश-इन' के दावे

बांग्लादेशी अखबारों का हवाला देते हुए जमात के नेता आजाद ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में सीमा पर 50 से ज्यादा कथित 'पुश-इन' की घटनाएं हुई हैं.

उनके मुताबिक, मार्च, अप्रैल और मई के दौरान अलग-अलग सीमा चौकियों से 2,479 लोगों को बांग्लादेश भेजने की कोशिश की गई. उन्होंने दावा किया कि वास्तविक संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है.

आजाद ने यह भी आरोप लगाया कि BNP सरकार के पहले 100 दिनों में BSF की गोलीबारी में 19 बांग्लादेशी मारे गए और 24 घायल हुए. उन्होंने यह भी दावा किया कि 83 लोगों को BSF और म्यांमार के अराकान आर्मी ने हिरासत में लिया या जबरन उठा लिया. उन्होंने कहा कि 'पुश-इन का हर कीमत पर विरोध किया जाएगा.'

भारत का क्या कहना है?

जमात गठबंधन की घोषणा ऐसे समय हुई है जब इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर भी बातचीत चल रही है. बांग्लादेश के अनुसार, 8 से 11 जून के बीच नई दिल्ली में हुई BSF और BGB की 57वीं महानिदेशक स्तर की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया.

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भारत लगातार 'पुश-इन' शब्द को खारिज करता रहा है. भारत का कहना है कि केवल अवैध विदेशी नागरिकों को जरूरी जांच और तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके देश भेजा जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत चाहता है कि बांग्लादेश नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया तेज करे, ताकि लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके.

भारत का आधिकारिक रुख है कि देश में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों को कानून, तय प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच बनी व्यवस्था के अनुसार उनके देश वापस भेजा जाना चाहिए.

इस बीच पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई भी तेज की गई है. समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि सीमा जिलों के होल्डिंग सेंटरों से करीब 4,800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है, जबकि 836 अन्य लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है.

भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत की किसी भी देश के साथ सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. ऐसे में यह मुद्दा जहां दोनों देशों के बीच आधिकारिक बातचीत का हिस्सा है, वहीं जमात के नेतृत्व वाला गठबंधन इसे अब सड़कों पर भी उठाने की तैयारी कर रहा है.

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