पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच अफगानिस्तान की राजधानी काबुल शांत नजर आ रहा है, लेकिन यहां की जनता सतर्क है. लोग पाकिस्तान पर झूठ फैलाने और नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं. चार दशकों से संघर्षों की चक्की में पिसे अफगानिस्तान में तालिबान 2.0 के पिछले पांच सालों के अपेक्षाकृत शांत और स्थिर रहे हैं, जिससे लोगों में नई सुबह की उम्मीद जगी थी. लेकिन अब पाकिस्तान को इस शांतिपूर्ण और समृद्ध अफगानिस्तान के सपने के लिए खतरा माना जा रहा है. इसी बीच हमारे संवाददाता मीर फरीद ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूदा हालातों को ग्राउंड रिपोर्ट में समझाने की कोशिश की है.
स्थानीय बुजुर्गों व तालिबान नेताओं के साथ हुई गोलमेज समीक्षा बैठक में कई सकारात्मक बदलाव दिखाई दिए हैं. शहर की सड़कों पर शाम के सामाजिक महफिलें पूरी तरह लौट आई हैं. लोग काबुल के कैफे, प्रमुख बाजारों और व्यस्त जगहों पर अपना वक्त बिता रहे हैं. तालिबान प्रशासन ने सामाजिक पुलिसिंग में काफी ढील दी है जो उनके पहले शासनकाल से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है.
'ये सदियों पुराना मामला है'
अफगानिस्तान के कुंदूज में रहने वाले एक अफगानी नागरिक ने बताया कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर जो संघर्ष दिख रहा है, यहां भी अस्पतालों को तबाह किया गया. ये दोनों मुल्कों के बीच सदियों पुराना मामला है. हम फिलहाल कोई कमेंट नहीं कर सकते. दिल से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच मामले सुधर जाएं.
उन्होंने दावा किया कि बीच में कुछ लोग हैं, यहां भी और वहां भी जो दोनों देशों के बीच रिश्तों को बिगाड़ते हैं. अगर वहां से कुछ आ रहा है तो वो उनकी बेवकूफी है, यहां से कुछ जा रहा है तो ये इनकी बेवकूफी है. दोनों मुसलमान मुल्क हैं, दोनों को भाइयों की तरह एक-दूसरे के साथ रवैया रखना चाहिए, ताकि पहले की तरह तालमेल के साथ आगे बढ़ा जा सके.
उन्होंने ये भी कहा कि अफगान और पाकिस्तान के बीच ये गलतफहमियां सियासी लोगों के सियासी मकसद की वजह से होती हैं. वो इसे इस्तेमाल करते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालते हैं. गुलिस्तान जोर या अस्पताल जैसी घटनाओं को एंगेज करते हैं. जुल्म दोनों तरफ से जारी होता है.