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ईरानी ड्रोन अटैक से पस्त हुआ अमेरिका? सेना के अधिकारियों ने बंद कमरे में बताया सच

ईरान के लगातार ड्रोन हमलों को लेकर अमेरिकी सेना ने चिंता जताई है. सैन्य अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि अमेरिका ज्यादातर ड्रोन मार गिरा सकता है, लेकिन हर ड्रोन को रोक पाना संभव नहीं है. इसलिए अब अमेरिका ड्रोन लॉन्च साइट और मिसाइल ठिकानों को नष्ट करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है.

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एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सभी ड्रोन को नहीं मारा जा सकता. (Photo- ITG)
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सभी ड्रोन को नहीं मारा जा सकता. (Photo- ITG)

अमेरिका-इजरायल और ईरान में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना ने एक अहम चेतावनी दी है. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि ईरान की तरफ से दागे जा रहे सभी ड्रोन को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है. हालांकि अमेरिका ज्यादातर ड्रोन को मार गिरा रहा है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हो रहे हमलों के कारण कुछ ड्रोन बच निकल सकते हैं.

गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी डेन केन ने अमेरिकी सांसदों को बंद कमरे में दी गई एक गोपनीय ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि ईरान बड़ी संख्या में सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं.

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अधिकारियों ने ब्रीफिंग के दौरान कहा, "ईरान हजारों की संख्या में हमलावर ड्रोन तैनात कर रहा है. हम उनमें से ज्यादातर को मार गिरा रहे हैं, लेकिन हर एक ड्रोन को रोक पाना संभव नहीं है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ड्रोन रणनीति का मकसद अमेरिका को महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करना है. क्योंकि ड्रोन सस्ते होते हैं जबकि उन्हें गिराने के लिए इस्तेमाल होने वाले पैट्रियट और थाड जैसे सिस्टम बेहद महंगे हैं.

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अमेरिकी हथियारों के मुकाबले सस्ते हैं ईरानी ड्रोन

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान जिन ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, वे यूएस हथियारों के मुकाबले सस्ते लेकिन बेहद खतरनाक हैं. ये ड्रोन धीमी गति से और जमीन के काफी नीचे उड़ते हैं, जिससे पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें पहचानना और रोकना मुश्किल हो जाता है. खास तौर पर ईरान के 'शाहेद' जैसे आत्मघाती ड्रोन इस रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं.

इसी वजह से अमेरिकी सेना ने अब रणनीति बदल दी है. अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि सिर्फ ड्रोन गिराने पर निर्भर रहने के बजाय अब उनका ध्यान उन ठिकानों को नष्ट करने पर है, जहां से ये ड्रोन और मिसाइल लॉन्च किए जा रहे हैं. एक अधिकारी ने कहा, "हमारी प्राथमिकता अब ड्रोन और मिसाइल के लॉन्च साइट को जल्द से जल्द खत्म करना है, ताकि हमलों की संख्या कम की जा सके."

अमेरिका को रोजाना खर्च करना पड़ा रहा 1 अरब डॉलर

इस युद्ध में खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिकी रक्षा विभाग के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका को रोजाना करीब 2 अरब डॉलर तक खर्च करना पड़ा. हालांकि अब यह खर्च घटकर करीब 1 अरब डॉलर प्रतिदिन के आसपास आ गया है.

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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के पास युद्ध जारी रखने के लिए पर्याप्त हथियार हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "हमारे पास मध्यम और ऊपरी स्तर के हथियारों का भंडार लगभग असीमित है." हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सबसे आधुनिक हथियारों का स्टॉक उतना ज्यादा नहीं है जितना होना चाहिए.

क्या अमेरिका के पास है हथियारों का स्टॉक?

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने भी कहा कि अमेरिका के पास लंबा युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं. उन्होंने कहा, "हमारे हथियारों के भंडार दुनिया के कई ऐसे स्थानों पर हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है."

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