ईरान के खिलाफ युद्ध और फिर शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीति के नए संकट में घिर गए हैं. अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ईरान के खिलाफ आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की कोशिश की है, जिसके बाद ट्रंप ने अपने ही सहयोगियों पर खुलकर नाराजगी जताई है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब ईरान बातचीत की मेज पर आने को तैयार था और अमेरिका की बात मानने की स्थिति में था, तभी अमेरिकी सीनेट ने ऐसा कदम उठाकर उनकी कोशिशों को कमजोर कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सीनेट के इस कदम से दुनिया को यह संदेश गया कि अमेरिका अपनी ही रणनीति को लेकर एकजुट नहीं है.
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राष्ट्रपति ने खास तौर पर उन चार रिपब्लिकन सीनेटरों को निशाने पर लिया जिन्होंने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया. ट्रंप ने दावा किया कि इस वोटिंग के बाद ईरान ने भी सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर अमेरिका के भीतर क्या चल रहा है. उन्होंने कहा कि इससे उनका काम मुश्किल जरूर हुआ है, लेकिन वह किसी भी तरह अपना लक्ष्य हासिल करके रहेंगे.
अमेरिकी सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के अंतर से पारित हुआ. इसका मकसद ईरान के खिलाफ किसी भी नए सैन्य अभियान को कांग्रेस की मंजूरी के बिना आगे बढ़ने से रोकना है. यह पहली बार है जब इस तरह का प्रस्ताव कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित हुआ है, जिसने ट्रंप प्रशासन की नीति पर बढ़ती असहजता को उजागर कर दिया.
रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों - लिसा मुर्कोव्स्की, सुसान कॉलिन्स, रैंड पॉल और बिल कैसिडी - ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया. वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. इस वोटिंग ने दिखा दिया कि ईरान नीति को लेकर मतभेद अब सिर्फ दो दलों के बीच नहीं, बल्कि दोनों दलों के भीतर भी मौजूद हैं.
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रैंड पॉल ने वोटिंग के बाद कहा कि युद्ध की तुलना में शांति बेहतर विकल्प है. उनके मुताबिक, ट्रंप को ईरान के साथ ऐसा समझौता करने का अवसर मिलना चाहिए जो उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोके, लेकिन अमेरिका को एक और कभी खत्म न होने वाले मध्य-पूर्व युद्ध में न धकेले.
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव के महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की है. प्रशासन का कहना है कि यह एक "कंकरेन्ट रेजोल्यूशन" है, जिसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती और इसका कानूनी प्रभाव भी सीमित है. इसके बावजूद इसे कांग्रेस की राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है.
इस बीच एक नए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में ट्रंप की लोकप्रियता घटकर 30 फीसदी तक पहुंचने का दावा किया गया है. ईरान युद्ध की लागत, अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता और 2026 के मध्यावधि चुनावों की तैयारी के बीच यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद बनता जा रहा है.