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ममता बनर्जी को एक और झटका, करीबी सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर चुनावी हार, संगठन की कार्यशैली और बाहरी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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बारासात जिला अध्यक्ष पद काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा बना बड़ा सियासी संकेत. (File Photo: ITG)
बारासात जिला अध्यक्ष पद काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा बना बड़ा सियासी संकेत. (File Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष के सुर सामने आने लगे हैं. TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. इसके पीछे उन्होंने चुनावी हार और कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपनी प्रतिक्रिया में चुनावी प्रक्रिया के दौरान IPAC की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय IPAC टीम ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, जिससे पार्टी के कामकाज के तरीके पर असर पड़ा.

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, ''जिस तरह छोटे बच्चों ने चुनाव के दौरान हम पर दबाव डालने की कोशिश की थी, वो काम करने का सही तरीका नहीं है. मेरे क्षेत्र की सभी सीटों पर हमारी हार हुई है, इसलिए मैं इस्तीफा दे रही हूं.'' उनके बयान के बाद नई बहस शुरू हो गई है.

अपने पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वो अपने क्षेत्र में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेती हैं. बारासात जिले में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़ी घटनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को प्रभावित किया है.

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दस्तीदार ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पार्टी को और अधिक ईमानदार, पारदर्शी और जिम्मेदार होना होगा. उन्होंने TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी से अपील की है कि पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि संगठन मजबूत बने.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नई एजेंसियों की भूमिका पर उन्हें भरोसा नहीं है और परोक्ष रूप से IPAC की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. ये इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस को कई स्तरों पर राजनीतिक झटके लग रहे हैं. 

कई सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है और कुछ क्षेत्रों में उसकी स्थिति कमजोर होती दिख रही है. इसी बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है. पार्टी नेतृत्व चुनावी अनियमितताओं और EVM गड़बड़ी के आरोप लगा रहा है.

दूसरी तरफ संगठन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं. काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे TMC के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले दिन TMC के लिए बहुत अहम हैं.

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