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'राष्ट्रपति का अपमान कर TMC ने पार कीं सारी हदें...', पीएम मोदी ने ममता सरकार पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार शर्मनाक है और यह लोकतंत्र तथा आदिवासी समुदाय के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है. दरअसल, राष्ट्रपति मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने सिलीगुड़ी के फांसीदेवा पहुंची थीं, जहां तय प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री या कोई मंत्री मौजूद नहीं था और कार्यक्रम का स्थल भी छोटा होने के कारण कई लोग शामिल नहीं हो सके, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई.

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पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रपति के साथ व्यवहार शर्मनाक था. (File Photo: ITG)
पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रपति के साथ व्यवहार शर्मनाक था. (File Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 'राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार बेहद शर्मनाक है'. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखता है, वह इस घटना से दुखी है. 

पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'यह बहुत शर्मनाक घटना है. जो लोग भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वे इससे आहत और निराश हैं. राष्ट्रपति, जो खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं, उन्होंने जो पीड़ा और दुख व्यक्त किया है, उससे देश के लोगों के मन में भी गहरा दुख पैदा हुआ है.'

'टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने इस मामले में सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए राज्य का प्रशासन जिम्मेदार है. यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को पश्चिम बंगाल सरकार ने इतनी लापरवाही से लिया.' उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान होना चाहिए. उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी इस मामले में समझदारी से काम लेगी.'

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राष्ट्रपति ने जाहिर की नाराजगी

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र पहुंची थीं. राष्ट्रपति ने इस बात पर नाराजगी और दुख जताया कि तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य का कोई मंत्री मौजूद नहीं था. हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इससे कोई आपत्ति नहीं है.

कार्यक्रम के बाद उन्होंने कॉन्फ्रेंस के लिए तय किए गए स्थान को लेकर नाराजगी जाहिर की. राष्ट्रपति ने कहा कि कार्यक्रम के लिए जो जगह तय की गई थी वह काफी छोटी थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए. उन्होंने बताया कि उस जगह पर पांच हजार लोगों के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी.

कार्यक्रम स्थल के आकार से नाराज हुईं राष्ट्रपति मुर्मू

कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं. वहां मैदान का आकार देखकर उन्होंने आश्चर्य जताया और कहा कि यह मैदान काफी बड़ा है और यहां लाखों लोग आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी मैदान में किया जाता तो करीब पांच लाख लोग इसमें शामिल हो सकते थे. राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि जब इतना बड़ा मैदान उपलब्ध था तो फिर कार्यक्रम के लिए इतनी छोटी जगह क्यों चुनी गई.

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ममता बनर्जी ने क्या कहा?

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन की तरह हैं और वह उन्हें बहन की तरह ही प्यार करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ममता उनसे नाराज हैं, लेकिन इसके बावजूद यह समझ में नहीं आता कि अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए इतनी छोटी जगह क्यों दी गई. राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे उन्हें छोटे मैदान में कार्यक्रम में बुलाकर जल्द वापस भेजने की व्यवस्था की गई हो.

'कार्यक्रम, आयोजकों या फंडिंग की कोई जानकारी नहीं'

इस मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक धरना स्थल से बोलते हुए कहा, 'मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को बीजेपी ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भेजा है. राष्ट्रपति बीजेपी की राजनीति में फंस गई हैं.' ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार इस कॉन्फ्रेंस की आयोजक नहीं थी और उन्हें इस कार्यक्रम, आयोजकों या फंडिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं, तभी उन्हें आधिकारिक सूचना मिलती है.

'जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हुए...'

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ममता बनर्जी ने कहा, 'जब मणिपुर, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचार हुए, तब राष्ट्रपति ने क्यों आवाज नहीं उठाई. पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के विकास के लिए कई काम किए गए हैं, लेकिन उनकी जानकारी राष्ट्रपति को नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'हम राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं. अगर आप 50 बार आएं तो हर बार कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. मैं इस समय धरने पर बैठी हूं. मुझे इस कार्यक्रम, इसके आयोजकों या फंडिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अगर आप साल में एक बार आएंगी तो मैं आपका स्वागत कर सकती हूं, लेकिन अगर आप चुनाव के समय आएंगी तो मेरे लिए आपके कार्यक्रमों में शामिल होना संभव नहीं होगा, क्योंकि उस समय मैं लोगों के अधिकारों की लड़ाई में व्यस्त रहती हूं.'

'बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश'

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले बंगाल को बांटने की राजनीति की जा रही है और राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा, 'बंगाल चुनाव के बाद हमारा अगला लक्ष्य दिल्ली होगा और हम पूरे देश में घूमकर बीजेपी की सच्चाई उजागर करेंगे.' ममता ने यह भी कहा कि वह समय आने पर एपस्टीन फाइल का भी खुलासा करेंगी.

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