पश्चिम बंगाल की सालतोरा विधानसभा सीट एक बार फिर चंदना बाउरी की ऐतिहासिक राजनीतिक यात्रा की गवाह बनी है. कभी प्रवासी मजदूर और गृहिणी के रूप में संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाली चंदना बाउरी ने एक बार फिर चुनावी मैदान में जीत दर्ज की है.
केलाई गांव, सालतोरा ब्लॉक की रहने वाली चंदना बाउरी की कहानी सामान्य राजनीतिक पृष्ठभूमि से बिल्कुल अलग है. राजनीति में आने से पहले वह आर्थिक तंगी के चलते प्रवासी मजदूर के रूप में काम करती थीं और घर की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थीं लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव ने उनकी जिंदगी को एक नई दिशा दी, जब भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें सालतोरा सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने पहली बार विधायक बनकर सबको चौंका दिया.
2026 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा टिकट दिया. इस बार भी जनता ने उनके काम और छवि पर मुहर लगाई और चंदना बाउरी ने एक बार फिर जीत दर्ज की. उन्होंने कुल 1,15,180 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार उत्तम बाउरी को 32,135 वोटों के बड़े अंतर से हराया.
यह जीत सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि उस भरोसे की कहानी है जो सालतोरा की जनता ने एक साधारण पृष्ठभूमि से आई महिला पर जताया है. राजनीति में जहां अक्सर बड़े चेहरों और मजबूत संगठन का दबदबा माना जाता है, वहीं चंदना बाउरी का लगातार दूसरी बार जीतना यह दिखाता है कि जमीन से जुड़ी राजनीति अभी भी लोगों के दिलों में जगह रखती है.
राजनीति में आने से पहले चुनाव आयोग में दाखिल शपथपत्र के मुताबिक, उनके पास किसी तरह की कृषि भूमि नहीं थी. उनके पति दिहाड़ी मजदूर हैं और मजदूरी से ही अपना घर चलाते रहे. चंदना मजूदरी के दौरान अपने पति का भी हाथ बंटाती थीं. चंदना ने 12वीं तक पढ़ाई की है जबकि उनके पति सिर्फ आठवीं पास हैं. पति पत्नी दोनों का मनरेगा कार्ड भी है.
उनका सफर उन तमाम महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। प्रवासी मजदूर से लेकर विधायक बनने तक की यह यात्रा सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक मजबूत कहानी भी बन चुकी है.