पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में राजनीतिक माहौल बदल गया है. और ये माहौल ऐसा बदला है कि घर से मंदिर तक, मैदान से पार्टी दफ्तरों तक हलचल मची हुई है. शुभेंदु राज में बंगाल में पुलिस से लेकर हुकूमत तक और नेता से लेकर सियासत तक सब एक्शन में नजर आ रहे हैं. इससे टीएमसी की टेंशन बढ़ती दिख रही है.
कारण ये है कि एक तरफ पूरे बंगाल में टीएमसी नेताओं के खिलाफ कानून का डंडा चलना शुरू हो गया है, दूसरी तरफ टीएमसी के नेता पार्टी छोड़-छोड़कर जा रहे हैं. और जो अब तक नहीं गए हैं, उनके बीच अंदरूनी घमासान शुरू हो गया है.
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी थीं. उन्हें सीआईएसएफ की Y कैटेगरी सुरक्षा भी मिल चुकी है. अब काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि टीएमसी के ही लोकसभा चीफ व्हीप कल्याण बनर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए.
काकोली का आरोप है कि कल्याण बनर्जी ने संसद में कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार किया. हालांकि ऐसे आरोप पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी लगा चुकी हैं. लेकिन कल्याण बनर्जी का कहना है कि अगर काकोली घोष को शिकायत थी तो उन्होंने तीन महीने पहले संसद में इसकी शिकायत क्यों नहीं की.
कल्याण बनर्जी का दावा है कि नारदा स्टिंग मामले में काकोली घोष के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है, इसलिए दूसरी मंशा से ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं.
लेकिन मामला सिर्फ काकोली घोष तक सीमित नहीं है. थोड़ी देर पहले टीएमसी प्रवक्ता शांतनु सेन ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया और कहा कि टीएमसी में भ्रष्टाचार है. उधर बीजेपी सांसद सौमित्र खान का दावा है कि अगर दिल्ली से इजाजत मिल जाए तो टीएमसी के 20 सांसद बीजेपी में शामिल हो जाएंगे और पार्टी खत्म हो जाएगी.
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इधर 15 नगरपालिका, नगर निगम और ग्राम पंचायतों से करीब 127 टीएमसी नेताओं और पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. टीएमसी नेताओं पर 181 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और दर्जनों गिरफ्तारियां भी हुई हैं.
ऐसे में सवाल ये है कि क्या बंगाल में अब टीएमसी अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है? जिस तरह टीएमसी के विधायक सीएम शुभेंदु अधिकारी से लेकर मंत्री निशीथ प्रमाणिक की बैठकों में पहुंच रहे हैं, क्या वो बंगाल में टीएमसी के भविष्य के संकेत हैं?
बंगाल में शुभेंदु राज और टीएमसी में हलचल
बंगाल में बीजेपी का शुभेंदु राज क्या आया, टीएमसी के अंदर से लेकर बाहर तक कोहराम मच गया. नया विवाद टीएमसी के दो सांसदों के टकराव को लेकर है. टीएमसी सांसद काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर अपनी ही पार्टी के चीफ व्हीप कल्याण बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है. आरोप है कि कल्याण बनर्जी ने संसद में उनके साथ दुर्व्यवहार किया.
कल्याण बनर्जी का कहना है कि आरोप झूठे हैं और इसके पीछे दूसरी कहानी है. उनका दावा है कि नारदा स्टिंग मामले में काकोली घोष के खिलाफ सीबीआई केस लंबित है और उसी से बचने के लिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं. दरअसल चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर भूचाल मचा हुआ है.
गिरफ्तारियां, छापे और कार्रवाई
टीएमसी विधायक दिलीप मंडल को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार किया गया. बशीरहाट में टीएमसी के म्यूनिसिपैलिटी चेयरमैन के खेतों से सोना और नकदी मिलने के बाद गिरफ्तारी हुई. कूचबिहार में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले के मामले में टीएमसी नेता तन्मय दास और सुब्रत आचार्य गिरफ्तार किए गए.
उत्तर 24 परगना में अजित साहा और सुजीत साहा के घरों से करेंसी, राइफल, गोलियां और शराब बरामद होने का दावा किया गया. हुगली के टीएमसी जोनल चेयरमैन सुखदेव महतो गिरफ्तार हुए. बिधाननगर नगर निगम के चार टीएमसी पार्षदों की गिरफ्तारी हुई. दक्षिण दमदम नगरपालिका से पूर्व मंत्री सुजीत बोस गिरफ्तार हुए.
बर्धमान नगरपालिका से टीएमसी पार्षद शहाबुद्दीन खान, माथाभांगा नगरपालिका से चंद्रशेखर राय और हावड़ा से टीएमसी नेता आकाश सिंह की गिरफ्तारी हुई. इतना ही नहीं, आसनसोल में सेल की जमीन पर बने टीएमसी और लेफ्ट के दफ्तरों पर भी कार्रवाई हुई. नादिया, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे जिलों में प्रधानों, पार्षदों और टीएमसी नेताओं के खिलाफ 181 से ज्यादा नई FIR दर्ज की गईं.
भ्रष्टाचार और अंदरूनी भगदड़
टीएमसी के 15 साल के शासन में पनपे भ्रष्टाचार, अपराध और सियासत के गठजोड़ की परतें खुलने लगी हैं. कहीं से करोड़ों की नकदी बरामद हो रही है, तो कहीं सोना, हथियार, आधार कार्ड और सरकारी दस्तावेज मिलने के दावे किए जा रहे हैं.
कार्रवाई तेज होते ही टीएमसी नेताओं में भागमभाग मच गई
काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पद छोड़ दिए. टीएमसी प्रवक्ता शांतनु सेन ने इस्तीफा दे दिया. 15 स्थानीय निकायों से 127 पार्षदों ने पद छोड़ दिए.
टीएमसी के छह विधायक शुभेंदु अधिकारी की बैठकों में दिखाई दिए. विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा विधानसभा स्पीकर से मिलने पहुंचे. उत्तर बंगाल के 13 विधायक मंत्री निशीथ प्रमाणिक की बैठक में पहुंचे. टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
शांतनु सेन का कहना है कि अगर जनता ने नौकरी घोटाले, आरजी कर मामले और अभया केस जैसे मुद्दों पर वोट दिया है, तो उनका अंतर्मन अब ऐसे भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं कर सकता.
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बीजेपी का दावा और दलबदल की राजनीति
बीजेपी का दावा है कि अगर दिल्ली से हरी झंडी मिल जाए तो टीएमसी का नामोनिशान मिट सकता है. बीजेपी सांसद सौमित्र खान का दावा है कि 20 टीएमसी सांसद बीजेपी में आने के लिए तैयार हैं, बस पार्टी नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार है. दावा ये भी किया जा रहा है कि 50 नाराज विधायकों समेत मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण बंगाल के कई नेता बीजेपी के संपर्क में हैं.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के आंकड़ों के मुताबिक 2024 के चुनाव नतीजों के बाद से 150 से ज्यादा सांसद और विधायक अपनी पार्टियां छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. हालांकि हर चुनाव से पहले और बाद में दलबदल देखने को मिलता है, लेकिन इस बार लगभग हर दल के नेताओं का रुख बीजेपी की तरफ दिखाई दे रहा है. इसी की ताजा मिसाल आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में शामिल होना भी बताया जा रहा है.