तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर NCPI में शामिल हुए 20 बागी सांसदों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. बागी सांसदों में शामिल जगदीश बसुनिया ने दावा किया है कि इनमें से 17 सांसद जल्द भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे, जबकि तीन मुस्लिम सांसद NCPI में रहते हुए NDA का समर्थन जारी रखेंगे. यह बयान ऐसे समय आया है, जब 20 सांसदों के दल बदलने का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.
जगदीश बसुनिया ने कहा कि उनका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना था और इसी वजह से 20 सांसदों ने NDA के साथ जाने का फैसला किया. उन्होंने कहा, 'हमने BJP में शामिल होने का भी फैसला किया है. इसमें थोड़ा समय लगेगा.'
बसुनिया के मुताबिक, TMC ने सांसदों के खिलाफ लोकसभा स्पीकर के पास शिकायत की है. इस मामले में 20 सांसदों को 22 सितंबर तक अपना जवाब देना है. उन्होंने दावा किया कि जवाब दाखिल करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे का रास्ता साफ होगा.
'17 BJP में जाएंगे, तीन NCPI में रहेंगे'
बसुनिया ने दलबदल विरोधी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि किसी पार्टी से अलग होने की स्थिति में दो-तिहाई संख्या महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने दावा किया कि TMC के कुल 28 सांसदों में से 20 ने साथ जाने का फैसला किया है और इस संख्या के आधार पर उन्हें दलबदल विरोधी कानून से संरक्षण मिलना चाहिए. हालांकि, इस दावे से जुड़े कानूनी सवाल फिलहाल अदालत के सामने हैं.
उन्होंने कहा कि 20 बागी सांसदों में से 17 BJP में शामिल होंगे, जबकि अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान NCPI में ही रहेंगे. बसुनिया ने दावा किया कि तीनों सांसद NDA का हिस्सा बने रहेंगे और उसकी बैठकों में भी शामिल होंगे, लेकिन BJP की सदस्यता नहीं लेंगे.
उन्होंने इसके पीछे इन सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को वजह बताया. बसुनिया के मुताबिक, इन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक आबादी अधिक होने के कारण तीनों सांसद सीधे BJP में शामिल नहीं होंगे, लेकिन NDA और BJP को समर्थन देते रहेंगे.
लोकसभा रिकॉर्ड में अभी भी TMC सांसद
गौरतलब है कि 20 सांसद एक कम चर्चित राजनीतिक दल NCPI में शामिल हुए हैं, जो एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बताया गया है. इन सांसदों ने औपचारिक रूप से NDA के साथ जाने की घोषणा की है, लेकिन लोकसभा के रिकॉर्ड में फिलहाल वे TMC सांसद ही बने हुए हैं, क्योंकि उनके दल बदलने को अभी स्पीकर की मंजूरी नहीं मिली है.
मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. पिछली सुनवाई के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी 20 सांसदों से जवाब मांगा था. पहले उन्हें 26 अगस्त तक जवाब देना था, लेकिन सांसदों ने अतिरिक्त समय की मांग की. इसके बाद उन्हें 22 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है.
ऐसे में अब सभी की नजर 22 सितंबर के बाद होने वाली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर है.