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संदेशखाली: 4 साल बाद कब्र से निकला BJP कार्यकर्ता का कंकाल, पोस्टमार्टम से खुलेगा मौत का राज!

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता के कंकाल अवशेषों को कब्र से बाहर निकाला गया है. अदालत के आदेश पर अवशेषों को निकालकर पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है. परिवार ने इस मामले में सीबीआई जांच की भी मांग की है.

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बीजेपी कार्यतर्ता के शव के अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. (File Photo- PTI)
बीजेपी कार्यतर्ता के शव के अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. (File Photo- PTI)

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए एक बीजेपी कार्यकर्ता के कंकाल अवशेषों को कब्र से बाहर निकाला गया है. इन अवशेषों को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया है. 

ये मामला उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली का है. मृतक कार्यकर्ता आस्तिक चंद्र दास संदेशखाली के झांझनिया गांव के रहने वाले थे. चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनकी मौत हो गई थी और अब उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए उनके कंकाल के अवशेष बाहर निकाले गए हैं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अदालत के आदेश मृतक के कंकाल के अवशेषों को मजिस्ट्रेट और मृतक के परिजनों की मौजूदगी में निकाला गया. इस पूरी प्रक्रिया की बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है.

जबरदस्ती शव दफनाने का आरोप

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम के दिन तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने विजय जुलूस निकाला था. आरोप है कि इसी दौरान टीएमसी समर्थकों ने आस्तिक चंद्र दास पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था.

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मृतक के बेटे सुब्रत दास का आरोप है कि हमले के बाद उनके पिता को अस्पताल ले जाने से रोक दिया गया, जिसके कारण उन्होंने घर पर ही दम तोड़ दिया. परिजनों ने ये भी दावा किया कि घटना के बाद उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई थी और बिना पोस्टमार्टम कराए शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया. 

मामले पर बीजेपी की प्रतिक्रिया 

राज्य में प्रशासनिक बदलावों के बाद परिवार ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद यह आदेश जारी हुआ. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ये मामला 2021 के चुनाव के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों का जीता-जागता सबूत है. उस समय पुलिस मूकदर्शक बनी रही, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि दोषियों को सजा मिलेगी.

यह भी पढ़ें: बंगाल हिंसा केस में फंसे एक्टर परमब्रत चटर्जी और स्वस्तिका मुखर्जी, 5 साल पुराने ट्वीट को लेकर शिकायत दर्ज

परिवार ने इस मामले में जरूरत पड़ने पर सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. संदेशखाली में घटी इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में एक बार फिर सियासत गरमा गई है.

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