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आंखों देखी: 'पुष्पा भाग गया...', फलता में बदला माहौल, बूथों पर दिखी बेखौफ वोटिंग

पश्चिम बंगाल की आखिरी बची फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को भारी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान संपन्न हो गया. बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद, खुद को 'पुष्पा' कहने वाले टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान ऐन वक्त पर नाम वापस लेकर गायब हो गए और ग्राउंड पर उनके घर पर ताला लटका मिला. शाम 6 बजे मतदान खत्म होने तक यहां 87.73% रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई. इस सीट का नतीजा 24 मई को आएगा.

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फालता के मतदान केंद्र पर मुस्तैद दिखे केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान (Photo: ITG)
फालता के मतदान केंद्र पर मुस्तैद दिखे केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान (Photo: ITG)

सुबह के करीब 8 बजे थे. मैं पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर था. आज पूरे डायमंड हार्बर इलाके में सिर्फ इसी सीट पर वोटिंग हो रही थी. यह कोई सामान्य चुनाव नहीं था, बल्कि पुनर्मतदान था. 29 अप्रैल को यहां वोटिंग के दौरान बूथ कब्जाने, ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और धांधली के आरोप लगे थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने पूरे फलता विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला किया.

सबसे पहले मैं उस शख्स के घर पहुंचा, जो चुनाव के दौरान खुद को 'पुष्पा' कहकर बुलाता था. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान. वही जहांगीर, जो मंच से कहा करते थे, 'मैं पुष्पा हूं, झुकेगा नहीं.' लेकिन गुरुवार सुबह तस्वीर बिल्कुल बदली हुई थी. तीन मंजिला मकान का बड़ा लोहे का गेट बंद था. मैंने और मेरे कैमरापर्सन शुभोजीत गेन ने कई बार आवाज लगाई, दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया. घर के पास छोटी गली थी, बगल में तालाब था, लेकिन 'पुष्पा' का कहीं कोई पता नहीं था.

जाहंगीर खान ने मंगलवार को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पुनर्मतदान से हटने का ऐलान कर दिया था. बंगाल की 294 में से 293 सीटों के नतीजे पहले ही आ चुके थे, जहां बीजेपी 207 और टीएमसी 80 सीटें जीत चुकी है. सिर्फ फलता सीट का फैसला बाकी था. इलाके में घूमते हुए एक वोटर ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा, 'अब पुष्पा झुक गया... पुष्पा भाग गया.' यह सिर्फ एक तंज नहीं था, बल्कि इलाके में बदले माहौल की भी एक तस्वीर थी.

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जाहंगीर के घर से निकलने के बाद मैं कई पोलिंग बूथों पर गया. सबसे बड़ी बात जो मैंने देखी, वह यह थी कि करीब 90 फीसदी बूथों पर टीएमसी के पोलिंग एजेंट नजर नहीं आए, जबकि उनका नाम ईवीएम पर मौजूद था. बूथों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें थीं, लेकिन डर का माहौल नहीं दिखा. लोग खुलकर बात कर रहे थे. एक वोटर ने मुझसे कहा, '10-12 साल बाद ऐसा लग रहा है कि सच में वोट डाल पा रहे हैं. पहले डर रहता था. अब खुलकर वोट दे रहे हैं.' करीब 70 साल के एक बुजुर्ग ने कैमरे पर कहा, 'मैंने लेफ्ट, कांग्रेस और टीएमसी सबके समय में वोटिंग देखी है, लेकिन आज जैसी वोटिंग कभी नहीं हुई. पहली बार बिना डर के वोट दिया.'

फलता सीट अहम इसलिए भी है, क्योंकि यह डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है, जहां टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने 7.5 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी. इसी विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी को पहले करीब 1.6 लाख वोटों की बढ़त मिली थी.

इस बार चुनाव आयोग ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे. हर बूथ पर 10 से 12 केंद्रीय बलों के जवान तैनात थे. इलाके की निगरानी के लिए IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को जिम्मेदारी दी गई थी, जिन्हें उनकी सख्त रवैये के लिए जाना जाता है. शाम 6 बजे तक यहां 87.73% मतदान दर्ज हुआ. अब फलता का फैसला ईवीएम में बंद है और नतीजे 24 मई को आएंगे.

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