एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं.
एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा.'
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे... ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं... अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.'
उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है.
हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?'
बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है.
बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.
इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं.
(इनपुट- लेसन लोध)