उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जहां किसी राजेंद्र मौर्य जैसे गरीब व्यापारी के लिए दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बनाए जा सकते थे, जहां से वह अपनी प्रतिभा और कारीगरी का परिचय दुनिया को दे सकता था, वहां वक्फ के नाम पर जमीन पर कब्जा करवाकर कुछ चुनिंदा लोगों ने उसका वारा-न्यारा कर लिया. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक बार भी इसके खिलाफ नहीं बोली.
उन्होंने कहा कि अयोध्या के बारे में मैंने पिछले दिनों कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी गठन की मांग की थी. मैंने कहा था कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी. प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई की, एफआईआर दर्ज कराई गई और जिनके खिलाफ साक्ष्य मिले, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि हिंदुओं की आस्था के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के मुंह पर फेविकोल क्यों लग जाता है? जब हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे के पैसे का दुरुपयोग कब्रिस्तानों की बाउंड्री बनाने में होता था, तब क्या आस्था आहत नहीं होती थी?
जब अवैध बूचड़खाने चलाए जाते थे, गौमाता की हत्या होती थी और तस्करों को संरक्षण मिलता था, तब क्या हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी? जब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां और लाठियां चलवाई गईं, तब क्या हिंदुओं की आस्था आहत नहीं हुई थी?
जब भगवान राम और भगवान कृष्ण को काल्पनिक बताया जाता था, तब क्या आस्था आहत नहीं होती थी? जब कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जाता था, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन रोके जाते थे, दुर्गा पूजा के पंडालों पर रोक लगाई जाती थी, तब क्या हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी?
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जब हिंदू पर्व-त्योहारों से पहले दंगे और उपद्रव होते थे, तब क्या आस्था आहत नहीं होती थी? समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना चाहिए. हर जागरूक नागरिक को उनसे यह प्रश्न पूछना चाहिए.
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट अपना कार्य कर रहा है और मंदिर की व्यवस्था का संचालन कर रहा है. ट्रस्ट जिस प्रकार से कार्य कर रहा है, उसका परिणाम आज भगवान राम के भव्य मंदिर के रूप में पूरे देश के सामने है.
इनकी पीड़ा यह है कि जहां वे बाबरी गुलामी का ढांचा देखना चाहते थे, वहां आज आप सबके पुरुषार्थ से भगवान राम का भव्य मंदिर खड़ा है. यही समाजवादी पार्टी की सबसे बड़ी पीड़ा है.
मुझे लगता है कि अब तो गिरगिट भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से शर्माता होगा, क्योंकि ये लोग उससे भी तेजी से रंग बदलते हैं. इनके दोहरे चरित्र को जनता अच्छी तरह समझ चुकी है.
सभी को आश्वस्त करता हूं कि सुरक्षा का मुद्दा हो, गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना हो, युवाओं को रोजगार देना हो या व्यापारियों और बेटियों को सुरक्षा एवं सम्मान देना हो, हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है.