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मेरठ बना 'स्टार्टअप सिटी', योगी सरकार की योजनाओं से बदली युवाओं और महिलाओं की तकदीर

मेरठ अब रोजगार मांगने वालों का नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमियों का शहर बनता जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार की स्वरोजगार और स्टार्टअप योजनाएं इस सकारात्मक बदलाव में अहम भूमिका निभा रही हैं. 'मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना' और 'स्टैंड-अप इंडिया' जैसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है.

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राजकुमार की फैक्ट्री में आठ महिलाएं और तीन पुरुष नियमित रूप से कार्यरत हैं, जबकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है. (Photo: ITG)
राजकुमार की फैक्ट्री में आठ महिलाएं और तीन पुरुष नियमित रूप से कार्यरत हैं, जबकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है. (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश सरकार की स्वरोजगार और स्टार्टअप आधारित योजनाएं अब मेरठ में जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी हैं. मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से युवा और महिला उद्यमी न केवल अपना कारोबार स्थापित कर रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रहे हैं.

मेरठ में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां सरकारी सहायता से छोटे स्तर पर शुरू हुआ कारोबार आज सफल उद्योग का रूप ले चुका है. इनमें मोमोज फैक्ट्री संचालित करने वाले युवा उद्यमी राजकुमार ठाकुर और हैंडीक्राफ्ट उद्योग चलाने वाली महिला उद्यमी ममता गर्ग प्रमुख उदाहरण हैं.

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मेरठ के युवा उद्यमी राजकुमार ठाकुर कभी निजी कंपनी में नौकरी करते थे. नौकरी के दौरान ही उनके मन में अपना व्यवसाय शुरू करने का विचार आया. उन्होंने तय किया कि लोगों को ताजा और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाएं. करीब चार-पांच वर्ष पहले उन्होंने मात्र 10 हजार रुपये की पूंजी से मोमोज का छोटा कारोबार शुरू किया.

शुरुआत में राजकुमार और उनकी पत्नी अपने हाथों से मोमोज तैयार करते थे और एक छोटे स्टॉल पर बेचते थे. ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती गई. स्वाद और गुणवत्ता के कारण स्थानीय रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स से भी ऑर्डर मिलने लगे. लेकिन बढ़ती मांग के सामने हाथों से उत्पादन करना संभव नहीं रह गया.

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इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना की जानकारी मिली. उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ. इस धनराशि से उन्होंने आधुनिक मोमोज निर्माण मशीन आयात की. मशीन लगने के बाद उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई और कारोबार तेजी से विस्तार करने लगा.

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आज उनकी फैक्ट्री में प्रतिदिन छह से सात हजार मोमोज तैयार किए जाते हैं. उनकी कंपनी ग्राहकों को 29 प्रकार के मोमोज उपलब्ध कराती है, जबकि फैक्ट्री में छह प्रमुख वैरायटी बड़े स्तर पर तैयार कर विभिन्न दुकानों और रेस्टोरेंट तक सप्लाई की जाती हैं. वर्तमान में उनके उत्पाद मेरठ के लगभग 30 से 35 आउटलेट्स तक पहुंच रहे हैं.

राजकुमार की फैक्ट्री में आठ महिलाएं और तीन पुरुष नियमित रूप से कार्यरत हैं, जबकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50 लोगों को रोजगार मिल रहा है. मेरठ के मंगल पांडे नगर और जागृति विहार स्थित उनके दोनों स्टॉलों पर प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है.

ग्रेजुएट राजकुमार और उनकी पोस्ट ग्रेजुएट पत्नी ने मिलकर इस व्यवसाय को खड़ा किया. उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत ऋण नहीं मिलता तो महंगी मशीन खरीदना संभव नहीं था. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और योजना से जुड़े अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहयोग ने उनके छोटे कारोबार को उद्योग का रूप दे दिया. अब उनका लक्ष्य फैक्ट्री का और विस्तार कर अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है.

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वहीं मेरठ की महिला उद्यमी ममता गर्ग भी सरकारी योजना से सफलता की नई मिसाल बन चुकी हैं. उन्होंने बिना बड़ी पूंजी के शुरू किए गए छोटे से हैंडीक्राफ्ट व्यवसाय को आज लाखों रुपये के कारोबार में बदल दिया है.

ममता गर्ग भगवान के पालने, सिंहासन, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजा सामग्री व होली से जुड़े विभिन्न हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार करती हैं. मेरठ में उनका रिटेल आउटलेट संचालित है, जहां से देशभर के व्यापारियों को थोक में सामान भेजा जाता है. उनके उत्पाद ऑनलाइन माध्यम से विदेशों तक भी पहुंच रहे हैं.

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उन्होंने करीब 15-16 वर्ष पहले महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण देकर अपने काम की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे उत्पादों की मांग बढ़ी तो कारोबार विस्तार के लिए पूंजी की आवश्यकता महसूस हुई. ऐसे में उन्होंने स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत बैंक से 10 लाख रुपये की ऋण सीमा और एक लाख रुपये की कार्यशील पूंजी प्राप्त की. इसी धनराशि से उन्होंने कच्चा माल खरीदा और उत्पादन बढ़ाया.

ममता बताती हैं कि बैंक ने पहले उनके व्यवसाय का मूल्यांकन किया, उसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ऋण स्वीकृत किया गया. वर्तमान में कारोबार पूरी तरह व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है. उन्होंने जीएसटी पंजीकरण भी कराया है. बिक्री की राशि बैंक खाते में जमा होती है और आवश्यकता के अनुसार उसी खाते से कच्चा माल खरीदा जाता है.

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आज ममता गर्ग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 25 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं. पहले महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है और उसके बाद उनके घरों पर ही हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार कराए जाते हैं. इससे अनेक परिवारों की आय का स्थायी साधन तैयार हुआ है.

एमएससी और एमफिल शिक्षित ममता गर्ग बताती हैं कि लगभग 16 वर्ष पहले उनके पति के निधन के बाद उन्होंने स्वयं कारोबार की जिम्मेदारी संभाली. आज उनका बड़ा बेटा इंजीनियर होने के साथ व्यवसाय में सहयोग कर रहा है, जबकि छोटा बेटा दिल्ली में हैंडीक्राफ्ट स्टूडियो शुरू करने की तैयारी कर रहा है.

उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके कारोबार का वार्षिक टर्नओवर करीब 32 लाख रुपये है. मेरठ में उनका स्टोर सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और जल्द ही दिल्ली में भी नया स्टोर शुरू किया जाएगा.

ममता का कहना है कि सरकार की योजनाएं उन लोगों के लिए बड़ी ताकत हैं, जिनके पास प्रतिभा तो होती है लेकिन पूंजी नहीं होती. समय पर ऋण मिलने से उद्यमी आत्मनिर्भर बनते हैं और आगे चलकर दूसरे लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराते हैं.

मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है. मेरठ में राजकुमार ठाकुर और ममता गर्ग जैसे उद्यमियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचे तो छोटे स्तर का कारोबार भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है. यही कारण है कि मेरठ अब धीरे-धीरे रोजगार मांगने वालों का नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमियों का शहर बनता जा रहा है.

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