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यूपी बीजेपी संगठन से कई दिग्गजों की छुट्टी, पार्टी में उनकी अगली भूमिका पर सस्पेंस

उत्तर प्रदेश बीजेपी संगठन का ऐलान गुरुवार को हो गया है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अगुवाई वाली टीम में 70 फीसदी नए चेहरों को जगह मिली है, लेकिन लंबे समय से संगठन पर काबिज पुराने और दिग्गज नेताओं की इस बार छुट्टी हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि अब उनका क्या होगा?

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यूपी बीजेपी की नई टीमें जहां कई दिग्गजों की छुट्टी हो गई है तो कई चौंकाने वाले नाम भी लिस्ट में शामिल हैं. (Photo-ITG)
यूपी बीजेपी की नई टीमें जहां कई दिग्गजों की छुट्टी हो गई है तो कई चौंकाने वाले नाम भी लिस्ट में शामिल हैं. (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद प्रदेश की नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है. गहन मंथन और पार्टी कार्यकर्ताओं की क्षमता को परखने के बाद गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी टीम घोषित कर दी है.  बीजेपी ने यूपी संगठन में भारी फेरबदल करते हुए 64 सदस्यीय टीम का ऐलान किया,  जिसमें 70 फीसदी नए चेहरों को मौका दिया है जबकि पार्टी ने अपने कई पुराने नेताओं और लंबे समय से जमे पदाधिकारियों को संगठन से छुट्टी कर दी गई है. 

बीजेपी ने प्रदेश संगठन की पूरी तरह से ओवरहालिंग कर दी गई है. 2022 में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए भूपेंद्र चौधरी की अगुवाई वाले प्रदेश संगठन को 55 से बढ़ाकर अब 64 कर दिया गया है. यूपी पुराने दिग्गजों और 10 साल से ज्यादा समय से पदों पर काबिज पदाधिकारियों को संगठन से हटा दिया गया है. 

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने टीम पंकज में युवा नेताओं को मौका दिया है, जिसके लिए 50 वर्ष से कम आयु वाले नेताओं ही अहमियत दी गई. इसीलिए संगठन में लंबे वक्त से जमे हुए नेताओं की छुट्टी कर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी संगठन से जिन नेताओं की छुट्टी हुई है, उन्हें पार्टी उनके लिए क्या रोल तय करेगी? 

बीजेपी संगठन से कई दिग्गजों की छुट्टी
2022 में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए भूपेंद्र चौधरी ने 45 सदस्यीय टीम बनाई थी, जिसमें सात महामंत्री, 18 उपाध्यक्ष और 16 प्रदेश मंत्री बनाए गए थे. इसके अलावा पार्टी के अलग-अलग मोर्चा के अध्यक्ष को मिलाकर 55 सदस्य हो गए थे. सूबे में भूपेंद्र चौधरी और स्वतंत्र देव सिंह के नेतृ्त्व वाली टीम में रहे बड़े चेहरे जो सूबे के संगठन से इस बार बाहर हो गए हैं.

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भूपेंद्र चौधरी के अगुवाई वाली टीम में गोविंद नारायण शुक्ला महामंत्री थे. इसके अलावा अमरपाल मौर्य महामंत्री थे, अनूप गुप्ता महामंत्री और सुभाष यदुवंश महामंत्री के पद पर थे.  पंकज चौधरी के अगुवाई वाली टीम में इन नेताओं को जगह नहीं मिल सकी है. गोविंदा नारायण शुक्ला विधान परिषद बना दिया गया है तो अमरपाल मौर्य राज्यसभा सांसद बन गए हैं. इसके अलावा अनूप गुप्ता और सुभाष यदुवंश भी एमएलसी बन गए हैं. 

पंकज सिंह की जगह पर नीरज सिंह 
केशव प्रसाद मौर्य से लेकर भूपेंद्र चौधरी तक के अगुवाई वाली टीम में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह उपाध्यक्ष के पद पर थे, लेकिन इस बार के संगठन में उनकी छुट्टी हो गई है. पंकज सिंह की जगह पर उनके छोटे भाई नीरज सिंह को उपाध्यक्ष बना दिया गया है. पंकज सिंह नोएडा से दूसरी बार विधायक हैं. माना जा रहा है सियासत में राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह को समाहित करने के लिए यह फार्मूला निकाला गया है. 

यूपी संगठन से बाहर हुए दिग्गजों का क्या होगा
यूपी बीजेपी संगठन में पिछले 12 साल से अमरपाल मौर्य काबिज थे, उन्हें केशव प्रसाद मौर्य का करीबी माना जाता है. 2022 में बीजेपी ने उन्हें ऊंचाहार विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन वो चुनाव नहीं जीत सके. इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया. अमरपाल मौर्य अब राष्ट्रीय स्तर पर काम करने को इच्छुक बताये जा रहे हैं. इसके चलते नितिन नवीन की टीम में उन्हें जगह मिल सकती है, क्योंकि ओबीसी समुदाय से आते हैं. मौर्य भी राष्ट्रीय संगठन जाने के जुगत में है. 

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अनूप गुप्ता विधान परिषद में लंबे समय से है इसलिए इस बार संगठन से जगह नहीं मिली है.  विजय बाहर बहादुर पाठक भी लंबे समय से थे और विधान परिषद में हैं और संतोष सिंह लंबे समय से संगठन में थे राष्ट्रीय टीम में जा सकते हैंय प्रदेश मंत्री के तौर पर डा चंद्र मोहन इस बार टीम से बाहर कर दिए गए, उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है माना जा रहा है. इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.

उपाध्यक्ष पद पर रहे कांता कर्दम सलिल बिश्नोई, नीलम सोनकर कमलावती सिंह सुनीता दयाल दिनेश कुमार शर्मा मानवेंद्र सिंह पदम सिंह चौधरी त्र्यंबक त्रिपाठी ऐसे लोग इस बार संगठन से बाहर हैं.सुभाष यदुवंश भी विधान परिषद सदस्य हैं और वो स्थानीय राजनीति के शिकार हुए हैं. इसी तरह से त्रयंबक त्रिपाठी प्रदेश उपाध्यक्ष से छुट्टी हो गई है. वो स्थानीय राजनीति के शिकार हुए हैं. 
 

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