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UP के 'दागी वकीलों' की बनेगी लिस्ट! बार काउंसिल ने मांगे नाम, 15 दिन में भेजनी होगी रिपोर्ट

अगर किसी वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज है... पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है... या मामला अदालत में ट्रायल पर है, तो अब उसका रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश बार काउंसिल तक पहुंचेगा. बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को बड़ा निर्देश जारी किया है. यह पूरी लिस्ट 15 दिनों के भीतर मांगी गई है.

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15 दिन के भीतर मांगी गई सूची. (Photo: Representational)
15 दिन के भीतर मांगी गई सूची. (Photo: Representational)

वकालत के पेशे में भी आपराधिक छवि वाले लोगों की पहचान होगी? उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने इसी दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां ऐसे वकीलों की सूची तैयार कर 15 दिनों के भीतर बार काउंसिल को भेजें, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है या किसी आपराधिक मामले का ट्रायल चल रहा है.

इतना ही नहीं, बार काउंसिल ने साफ कर दिया है कि अगर कोई बार एसोसिएशन तय समय में यह रिपोर्ट नहीं भेजती है तो उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है. यानी इस आदेश को हल्के में लेना बार एसोसिएशनों के लिए भारी पड़ सकता है.

बार काउंसिल के आदेश के मुताबिक, सभी बार एसोसिएशनों को ऐसे अधिवक्ताओं का विवरण भेजना होगा, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है. जिनके खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. जिनके खिलाफ किसी आपराधिक मामले में अदालत में ट्रायल चल रहा है. यानी सिर्फ सजा पाए हुए ही नहीं, बल्कि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अधिवक्ताओं का भी ब्योरा मांगा गया है.

up bar council orders identification of lawyers with criminal cases seeks list in 15-days

यह भी पढ़ें: कोलकाता गैंगरेप केस: वकालत नहीं कर पाएगा आरोपी मनोजीत मिश्रा, बार काउंसिल ने रद्द किया लाइसेंस

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने इस संबंध में प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को लेटर जारी किया है. इसमें कहा गया है कि 15 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट बार काउंसिल को उपलब्ध कराई जाए. इस कवायद का मकसद प्रदेश भर में ऐसे अधिवक्ताओं की पहचान करना है, जिनका नाम किसी आपराधिक मामले से जुड़ा हुआ है.

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बार काउंसिल ने आदेश में चेतावनी भी दी है. अगर कोई बार एसोसिएशन निर्धारित समय के भीतर मांगी गई सूची उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर संबंधित बार एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है.

यह कदम पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया है. पिछले कुछ वर्षों में अदालत परिसरों में मारपीट, हंगामे और कुछ अधिवक्ताओं पर आपराधिक मामलों में नाम आने जैसी घटनाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में बार काउंसिल अब यह जानना चाहती है कि प्रदेश में कितने अधिवक्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है. यही वजह है कि पहली बार प्रदेश स्तर पर सभी बार एसोसिएशनों से इस तरह का डेटा मांगा गया है.

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