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क्लच में स्टील पाइप, जुगाड़ से ड्राइविंग...स्कूल वैन का ड्राइवर निकला दिव्यांग

उत्तर प्रदेश के महराजगंज में स्कूली बच्चों को ले जा रही एक वैन का ड्राइवर दिव्यांग मिला. उसने वैन के क्लच में स्टील पाइप का जुगाड़ किया गया था. एआरटीओ ने वैन सीज कर चालक के लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है.

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ARTO ने गाड़ी सीज करके स्कूल के खिलाफ भी एक्शन लेने को कहा है (Photo: ITG)
ARTO ने गाड़ी सीज करके स्कूल के खिलाफ भी एक्शन लेने को कहा है (Photo: ITG)

स्कूल वैन में बैठकर रोजाना सफर करने वाले बच्चों के माता-पिता शायद ही यह सोचते हों कि जिस गाड़ी पर उन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षा का भरोसा किया है, वह किस हालत में सड़क पर दौड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में परिवहन विभाग की जांच के दौरान ऐसा मामला सामने आया, जिसने स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

मिशन सेफ फ्यूचर अभियान के तहत जब परिवहन विभाग की टीम एक स्कूल वैन की जांच कर रही थी, तब शुरुआत में मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन का लगा. लेकिन जैसे ही ड्राइवर को देखा तो अधिकारी भी हैरान रह गए. जिस वैन में स्कूली बच्चे रोज सफर करते थे, उसका चालक दिव्यांग था और वाहन को सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि जुगाड़ तकनीक के सहारे चला रहा था.

एक छोटी सी कमी से खुली पूरी कहानी

एआरटीओ मनोज सिंह की टीम स्कूल वाहनों की नियमित जांच कर रही थी. इसी दौरान फरेंदा क्षेत्र के एक स्कूल की वैन को रोका गया. अधिकारियों की नजर सबसे पहले वाहन पर लगी रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप की कमी पर पड़ी. इसके बाद वाहन के दस्तावेज जांचे गए तो बीमा भी समाप्त मिला. जब सुरक्षा मानकों की जांच शुरू हुई तो चालक को वाहन से नीचे उतरने के लिए कहा गया. यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया.

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चालक को देखकर अधिकारी भी रह गए हैरान

जैसे ही चालक वाहन से नीचे उतरा, अधिकारियों ने देखा कि वह बिना सहारे ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था. पूछताछ में पता चला कि करीब दो वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में उसका बायां पैर घुटने के नीचे गंभीर रूप से प्रभावित हो गया था. एआरटीओ के अनुसार, चालक वर्तमान में सामान्य तरीके से चलने-फिरने में भी सक्षम नहीं था. इसके बावजूद वह कई वर्षों से स्कूली बच्चों को लेकर सड़क पर वाहन चला रहा था.

क्लच में स्टील पाइप लगाकर चला रहा था वैन

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि वाहन के क्लच सिस्टम में स्टील पाइप लगाया गया था, जिसे रबर की मदद से बांधा गया था. प्राथमिक जांच में इसे एक अस्थायी जुगाड़ व्यवस्था माना गया. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के बदलाव वाहन की सुरक्षित संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में स्कूली बच्चों से भरे वाहन का संचालन गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है.

चार साल से चला रहा हूं गाड़ी

चालक विनोद ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से वाहन चला रहा है. उनके अनुसार, दो वर्ष पहले दुर्घटना में पैर खराब हो गया था, लेकिन इससे पहले किसी जांच में उन्हें नहीं रोका गया. उन्होंने कहा कि इस बार परिवहन विभाग की जांच के दौरान पहली बार कार्रवाई हुई. एआरटीओ मनोज सिंह ने बताया कि वाहन को सबसे पहले इसलिए रोका गया क्योंकि उसमें सुरक्षा मानकों के तहत जरूरी रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप नहीं लगी थी. इसके बाद जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं. उन्होंने कहा कि चालक की शारीरिक स्थिति को देखते हुए उससे स्कूली वाहन चलवाना बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही है. इसी आधार पर वाहन को सीज कर दिया गया और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.

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स्कूल के खिलाफ भी भेजी गई रिपोर्ट

परिवहन विभाग ने केवल चालक पर ही कार्रवाई नहीं की. एआरटीओ ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई है, ताकि स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा सके. यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो स्कूल के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है.

मिशन 'सेफ फ्यूचर' क्या है

उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान चला रहा है. इस अभियान के तहत स्कूल बसों और वैन के दस्तावेज, फिटनेस, बीमा, परमिट, सुरक्षा उपकरण, चालक की पात्रता और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है. महराजगंज में सामने आया मामला इसी अभियान के दौरान पकड़ में आया. इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर स्कूल प्रबंधन अपने वाहनों और चालकों की नियमित जांच क्यों नहीं कराते. विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल वाहन केवल फिटनेस प्रमाणपत्र के भरोसे सुरक्षित नहीं माने जा सकते. चालक की शारीरिक क्षमता, वाहन की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है. इस कार्रवाई के बाद स्थानीय अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि स्कूल उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेगा. यदि वाहन और चालक दोनों ही सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते तो यह बेहद गंभीर विषय है.

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जांच के बाद आगे होगी कार्रवाई

फिलहाल परिवहन विभाग ने स्कूल वैन को सीज कर दिया है. चालक के लाइसेंस को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया है. अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगी. यह मामला सिर्फ एक स्कूल वैन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी स्कूलों और अभिभावकों के लिए चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.

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