लखनऊ में विशेष जांच टीम (SIT) सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे के कथित गबन के मामले की अंतरिम रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित तीन सदस्यीय टीम वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच पूरी करने के लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त समय की मांग कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था. इस मामले की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं.
जांच टीम का गठन और अब तक की कार्रवाई
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं. सरकार ने इस टीम को शुरुआत में 15 दिनों का समय दिया था, जिसे बाद में 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया. एसआईटी ने 23 जून को राज्य सरकार को अपनी नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और चंदे से गबन की गई नकदी बरामद हुई.
प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश और आगे की रणनीति
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में मंदिर के प्रशासन और चंदा गिनने की प्रणाली में बड़े सुधारों की सिफारिश किए जाने की उम्मीद है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की इस निष्कर्ष और सुधारात्मक उपायों पर चर्चा करने के लिए 22 जुलाई को अयोध्या में एक बैठक भी होने वाली है. सुप्रीम कोर्ट इस समय कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच, फोरेंसिक ऑडिट और सीएजी (CAG) ऑडिट की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.
याचिकाओं में उठाए गए अहम सवाल
मामले के याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही एसआईटी ने अपनी जांच कैसे शुरू कर दी थी. इसके साथ ही याचिकाओं में कथित गबन के इस गंभीर मामले की समयबद्ध तरीके से पूरी जांच कराने की मांग पुरजोर तरीके से की गई है.