
यूपी के संभल में गुरुवार को कब्रिस्तान से कब्जा मुक्त हुई जमीन पर 1978 के दंगा पीड़ित परिवार बसाए गए. पुलिस-प्रशासन और मंत्री की मौजूदगी में हवन-पूजन के बाद आशियाने की नींव रखी गई. जमीन का पट्टा मिलने के बाद परिवारों के चेहरे खिल उठे. सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल के बाद ये सपना साकार हो सका.
आपको बता दें कि प्रदेश सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शेर खा सराय इलाके में 1978 के दंगा पीड़ित रस्तोगी परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा आवंटित किया. यह पुनर्स्थापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए आश्वासन और दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में विधि-विधान से हवन-पूजन और मंत्रोच्चारण के साथ भूमि पूजन करके मकान की नींव रखकर किया गया.

संभल हिंसा के बाद इस पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से पलायन के बाद दोबारा बसने की गुहार लगाई थी. यह वही सरकारी भूमि है जिसे प्रशासन ने 10 महीने पहले 12 अगस्त 2025 को कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से बुलडोजर चलाकर पूरी तरह मुक्त कराया था.
1978 के दंगे का खौफनाक सच
दरअसल, 24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद संभल में 1978 के दंगे का एक बेहद खौफनाक सच सामने आया था. उस वक्त दंगाइयों ने राम सरन दास रस्तोगी की दुकान पर चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी थी. बेरहमी की हद यह थी कि शव के टुकड़े कर उसे तराजू से बांधा और दुकान के सामने वाले कुएं में फेंक दिया. तीन दिन बाद जब शव मिला, तो उस पर चाकू के 109 निशान थे. इसके बाद धमकियों से परेशान होकर रस्तोगी परिवार ने संभल से पलायन कर दिया था.
कब्रिस्तान की जमीन पर भूमि पूजन
इस ऐतिहासिक दिन पर मृतक राम सरन दास रस्तोगी की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी और पौत्र कपिल रस्तोगी को जमीन आवंटन का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया. पट्टा देने से पहले इस कब्जा मुक्त हुई जमीन पर दंगा पीड़ित परिवार से बाकायदा वैदिक रीति-रिवाज से हवन-पूजन कराया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे यूपी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर और तमाम बड़े प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने आहुतियां दीं. इसके बाद सबने मिलकर पीड़ित परिवार के नए आशियाने की मजबूत नींव रखी.
प्रशासन और सरकार का सख्त रुख
समारोह में पहुंचे मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि 1 साल पहले पीड़ित परिवार ने संपर्क किया था, जिसके बाद मुरादाबाद से पुरानी पत्रावलियां निकालकर शासन को भेजी गईं. मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि जो भी दंगा पीड़ित परिवार संभल में वापस पुनर्स्थापित होना चाहता है, प्रशासन उसकी पूरी मदद करेगा और जमीन आवंटित की जाएगी. वहीं, यूपी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आज संभल को असली आजादी मिली है.अब अगर किसी ने सिर उठाया तो उसका जहन्नुम का टिकट कटना तय है.

सीएम योगी का बयान और सियासी घमासान
इस मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में मथुरा के एक कार्यक्रम में वर्ष 2026 का जिक्र करते हुए कहा था कि 1976 और 1978 के दंगों में कई हिंदू मारे गए, लेकिन सपा सरकार ने दंगाइयों के मुकदमे वापस ले लिए थे. उन्होंने पीड़ित परिवार को संपत्ति वापस दिलाने का भरोसा दिया था. दूसरी तरफ, 12 अगस्त 2025 को जब इस डेढ़ सौ साल पुराने कब्रिस्तान पर बुलडोजर चला था, तब सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद ने विधानसभा में इसे लेकर सरकार को घेरा था.
इंसाफ की आस हुई पूरी
प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद मृतक के पोते कपिल रस्तोगी ने भावुक होते हुए कहा कि 48 साल तक किसी सरकार ने हमारी सुध नहीं ली. उस समय की सरकार और इंदिरा गांधी ने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन योगी सरकार में हमें असली इंसाफ मिला है. परिवार ने मांग की है कि पुराने दंगाइयों को सख्त सजा मिले और जिस कुएं से उनके दादा का शव मिला था, उसका सौंदर्यीकरण कराकर उस चौराहे का नामकरण राम सरन दास रस्तोगी के नाम पर किया जाए.