प्रयागराज की संगम नगरी में माघ मेला की रौनक हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. रेतीले मैदान में विशाल शहर बसता है, जहां पुलिस पंडाल से लेकर श्रद्धालुओं के ठहराव तक सभी सुविधाएं होती हैं. इस संगम नगरी में एक अनोखा और खास आकर्षण है- 'राम नाम बैंक'... यह बैंक अन्य बैंकों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यहां नोटों और रुपयों की जगह केवल राम नाम की हस्तलिखित कॉपियां जमा होती हैं.
राम नाम बैंक के संचालन का जिम्मा ज्योतिषाचार्य आशुतोष के हाथों में है, जो वर्षों से इसकी देखरेख कर रहे हैं. देश-विदेश से आए श्रद्धालु यहां पूरी आस्था के साथ भक्ति की पूंजी जमा करते हैं. डॉ. अशोक तिवारी जैसे भक्त इसका उदाहरण देते हैं. डॉ. तिवारी कहते हैं कि हार्ट अटैक और तीन बार ऑपरेशन के बावजूद राम नाम लेखन से मेरी सेहत पूरी तरह ठीक है.
यहां देखें Video
राम नाम बैंक का मुख्यालय सिविल लाइंस में है, जबकि माघ मेला, अर्धकुंभ और कुंभ के दौरान यहां अस्थायी शाखाएं सेक्टर-1, अक्षय वट मार्ग पर खुलती हैं. यहां खाता खोलना बेहद आसान है- ऑनलाइन या ऑफलाइन. इसके लिए न कोई आईडी जरूरी है, न कोई शुल्क. बस अच्छे स्वभाव और सही कर्म का पालन करना होता है.
खाता खोलने के नियम भी सरल और प्रभावशाली हैं. खाताधारकों को तामसिक भोजन जैसे लहसुन, कच्चा प्याज, मांस, मछली और शराब से दूर रहना होता है. इसके साथ ही सत्य बोलना और झूठ से दूर रहना भी जरूरी है. खाता खोलने पर श्रद्धालु को 32 पेज की सादी कॉपी दी जाती है. हर पेज पर लाल पेन से 108 बार 'राम' नाम लिखना होता है, जिसे 9 के क्रम में लिखा जाता है.
मनोकामना पूरी करने के लिए भक्त सवा लाख राम नाम लिखी कॉपियां लेते हैं. पूरी होने पर यह दोगुनी संख्या में (2 लाख या अधिक) लाल कपड़े में लपेटकर बैंक में जमा की जाती हैं. श्रद्धालुओं की आस्था है कि इससे पुण्यफल की प्राप्ति होती है. सबसे अधिक नाम लिखने वालों को माघ मेला के दौरान सम्मानित भी किया जाता है.
राम नाम बैंक केवल एक आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का जीवंत उदाहरण बन चुका है. लाखों श्रद्धालु, जिनमें विदेशी भक्त भी शामिल हैं, यहां जुड़कर अपने जीवन में शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं. आशुतोष बताते हैं कि खाता खोलने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और लाभ मिलता है. यह बैंक माघ मेला की आध्यात्मिकता का प्रतीक बन गया है.