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सपा में टूट की चर्चा के बीच महिला सांसद ने अखिलेश को दिखाए तेवर, आजम खान की हैं करीबी

समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने एक राजनीतिक कार्यक्रम में आमंत्रित न किए जाने और पोस्टरों से तस्वीर गायब रखने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने पार्टी के एक स्थानीय नेता पर गुटबाजी और महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया, जबकि अखिलेश यादव और सपा नेतृत्व पर भरोसा जताया. रुचि वीरा ने कहा कि वह पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष से करेंगी और कार्रवाई की मांग करेंगी.

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मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है (Photo: ITG)
मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है (Photo: ITG)

समाजवादी पार्टी में सब कुछ सामान्य है या भीतर ही भीतर सियासी दरारें चौड़ी हो रही हैं? यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है. कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर के दावों के बाद मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी के एक नेता पर तीखा हमला बोल दिया. खुद को अपमानित किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें एक कार्यक्रम में जानबूझकर नहीं बुलाया गया, पोस्टरों से तस्वीर गायब रखी गई और इसके पीछे एक ऐसे नेता का हाथ है जो गुटबाजी कर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है. खास बात यह रही कि उन्होंने अखिलेश यादव पर पूरा भरोसा जताया, लेकिन साफ संकेत दे दिए कि मुरादाबाद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा.

मंच पर जगह नहीं मिली, पोस्टर से भी गायब रहीं सांसद

पूरा विवाद एक राजनीतिक कार्यक्रम से शुरू हुआ. सांसद रुचि वीरा का आरोप है कि उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित ही नहीं किया गया. इतना ही नहीं, कार्यक्रम से जुड़े किसी भी पोस्टर, बैनर या होर्डिंग पर उनकी तस्वीर तक नहीं लगाई गई. रुचि वीरा ने कहा कि यदि आयोजकों की मंशा उन्हें बुलाने की होती तो कम से कम सूचना जरूर दी जाती. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उनका कहना है कि यह कोई सामान्य चूक नहीं थी बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है. सांसद ने सवाल उठाया कि आखिर एक निर्वाचित सांसद को कार्यक्रम से दूर रखने की जरूरत क्यों महसूस हुई? और यदि ऐसा हुआ तो इसके पीछे किसकी मंशा काम कर रही थी?

‘यहां से सपा की अकेली महिला जनप्रतिनिधि हूं’

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अपनी नाराजगी जताते हुए रुचि वीरा ने महिला सम्मान का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि वह मुरादाबाद की पहली महिला सांसद हैं और वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी की एकमात्र महिला जनप्रतिनिधि हैं. ऐसे में किसी कार्यक्रम से उन्हें अलग रखना सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि महिला प्रतिनिधित्व की अनदेखी भी है. उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला सांसद को सम्मान नहीं दिया जाता तो यह गंभीर विषय है और इस पर पार्टी नेतृत्व को ध्यान देना चाहिए. रुचि वीरा ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी की विचारधारा महिलाओं के सम्मान की रही है. पार्टी ने उन्हें टिकट दिया, चुनाव लड़ाया और संसद तक पहुंचाया. इसलिए उनकी शिकायत पार्टी से नहीं है.

अखिलेश यादव को क्लीन चिट, निशाने पर ‘एक नेता’

अपने बयान में रुचि वीरा ने बेहद सावधानी से पार्टी नेतृत्व को विवाद से अलग रखा. उन्होंने कहा कि यह न तो समाजवादी पार्टी की सोच है और न ही अखिलेश यादव की. उनके अनुसार अखिलेश महिलाओं को सम्मान देने वाले नेता हैं और संगठन से लेकर टिकट वितरण तक महिलाओं को अवसर देते रहे हैं. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के एक स्थानीय नेता पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वही व्यक्ति पूरे घटनाक्रम के पीछे है. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि एक नेता लगातार गुटबाजी फैला रहा है, लोगों को बांट रहा है और पार्टी को कमजोर करने का काम कर रहा है. उनके अनुसार वही व्यक्ति लोगों से कहता है कि किसका फोटो लगाना है और किसे कार्यक्रम में नहीं बुलाना है.

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पीडीए जोड़ने का अभियान है, तोड़ने का नहीं

रुचि वीरा ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पीडीए की मूल भावना लोगों को जोड़ने की है. इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लाना है. उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े, किसान, युवा, व्यापारी, महिलाएं और अल्पसंख्यक—सभी को साथ जोड़ना ही पार्टी का लक्ष्य है. ऐसे में यदि कोई नेता लोगों को अलग करने की राजनीति कर रहा है तो वह पार्टी की विचारधारा के खिलाफ काम कर रहा है. सांसद का कहना था कि जोड़ने की राजनीति और तोड़ने की राजनीति दोनों साथ नहीं चल सकतीं.

राष्ट्रीय अध्यक्ष से करेंगी शिकायत

रुचि वीरा ने संकेत दिया कि वह पूरे मामले को सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखेंगी. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष को पूरी जानकारी देंगी और उनसे अनुरोध करेंगी कि मामले का संज्ञान लिया जाए. उनके अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी को नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि मुरादाबाद समाजवादी विचारधारा का मजबूत जिला रहा है और यहां संगठन को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. यही वजह है कि वह चाहती हैं कि पार्टी नेतृत्व जल्द हस्तक्षेप करे.

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आजम खान खेमे की नाराजगी के रूप में भी देखे जा रहे संकेत

राजनीतिक जानकार रुचि वीरा के बयान को सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं मान रहे. दरअसल, रुचि वीरा को लंबे समय से सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर के कद्दावर मुस्लिम चेहरे रहे आजम खान के करीबी नेताओं में गिना जाता है. ऐसे में उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही बड़ी राजनीतिक हलचलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि उन्होंने कहीं भी आजम खान का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके तेवरों ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी के अंदर सब कुछ सामान्य नहीं है. यही कारण है कि उनके बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दायरा मुरादाबाद से निकलकर लखनऊ तक पहुंच गया है.

ओपी राजभर को लेकर भी दिया बड़ा बयान

बातचीत के दौरान रुचि वीरा ने सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को लेकर भी दिलचस्प टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि राजभर के बयानों को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. साथ ही दावा किया कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि ओमप्रकाश राजभर खुद समाजवादी पार्टी में आने के लिए उत्सुक हैं और संपर्क साध रहे हैं. 

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