मोबाइल की स्क्रीन पर एक खूबसूरत लड़की की तस्वीर चमकी. साथ में संदेश था आपकी प्रोफाइल से मैच करती हैं. परिवार अच्छा है, लड़की शिक्षित है और शादी के लिए तैयार है. जिस लड़के ने यह संदेश देखा, उसके लिए शायद यह एक नई शुरुआत का संकेत था. घरवालों का दबाव था, उम्र बढ़ रही थी और रिश्ते बन नहीं रहे थे. उसे लगा कि शायद अब उसकी तलाश खत्म होने वाली है. लेकिन उसे नहीं पता था कि जिस दुल्हन से उसकी बातचीत शुरू होने वाली है, वह असल में कहीं मौजूद ही नहीं है. तस्वीर भी नकली थी और कहानी भी. इसी कहानी के पीछे बैठा था एक ऐसा गिरोह, जिसने शादी की तलाश में भटक रहे युवकों को अपना सबसे आसान शिकार बना लिया था.
इस कहानी की शुरुआत एक शिकायत से हुई. एक युवक कानपुर पुलिस के पास पहुंचा. उसने बताया कि उसने एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा. उसे कई रिश्तों के प्रस्ताव दिखाए गए. फोन कॉल आने लगे. मैरिज काउंसलर बताने वाली महिलाएं उससे लगातार संपर्क में रहीं. हर बार उसे यही भरोसा दिया गया कि उसकी शादी लगभग तय हो चुकी है. लेकिन हर कदम पर एक नई फीस सामने आ जाती थी.
कभी प्रोफाइल एक्टिवेशन चार्ज. कभी प्रीमियम मेंबरशिप. कभी परिवार से बातचीत कराने की फीस. कभी दस्तावेज सत्यापन शुल्क. और कभी शादी फाइनल कराने के नाम पर अलग भुगतान. युवक पैसे देता गया. उम्मीद भी बढ़ती गई. लेकिन शादी कभी नहीं हुई. जब तक उसे सच्चाई समझ में आई, तब तक करीब चार लाख रुपये उसके खाते से निकल चुके थे. पुलिस को लगा मामला सामान्य नहीं. शिकायत सुनने के बाद मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी का नहीं लगा. कानपुर पुलिस को अंदेशा हुआ कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर आईपीएस अंजलि विश्वकर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इसके बाद शुरू हुई कई दिनों तक चलने वाली जांच. पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की. सबसे पहले उन वेबसाइटों और कॉल सेंटरों की गतिविधियों को समझा गया. डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले गए. फोन नंबरों का विश्लेषण किया गया. बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई. और फिर धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी.
दुल्हन नहीं, डेटा ढूंढा जाता था
जांच में सामने आया कि गिरोह का असली कारोबार शादी कराना नहीं, बल्कि शादी का सपना बेचना था. पुलिस के मुताबिक आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम और विभिन्न मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से युवकों का डेटा इकट्ठा करते थे. ऐसे युवक, जिनकी प्रोफाइल में साफ लिखा होता था कि वे विवाह के इच्छुक हैं. ऐसे लोग जो जीवनसाथी की तलाश में सक्रिय हैं. ऐसे लोग जो भावनात्मक रूप से जल्दी भरोसा कर लेते हैं. यही गिरोह का टारगेट बनते थे.
कॉल सेंटर से शुरू होता था रिश्ता
डेटा मिलते ही कॉल सेंटर से फोन जाता था. फोन करने वाली युवतियां खुद को मैरिज काउंसलर बताती थीं. बातचीत बेहद पेशेवर अंदाज में होती थी. सामने वाले को लगता था कि वह किसी प्रतिष्ठित मैट्रिमोनियल संस्था से बात कर रहा है. उसे बताया जाता कि उसकी प्रोफाइल काफी पसंद की गई है. कुछ ही दिनों में उसे एक या कई लड़कियों की तस्वीरें भेजी जाती थीं. यहीं से खेल का सबसे खतरनाक हिस्सा शुरू होता था.
AI वाली दुल्हन का जाल
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह इंटरनेट से महिलाओं की तस्वीरें डाउनलोड करता था. इसके बाद एआई और एडिटिंग टूल्स की मदद से उन्हें आकर्षक प्रोफाइल में बदल दिया जाता था. किसी को डॉक्टर बनाया जाता. किसी को इंजीनियर. किसी को सरकारी अधिकारी की बेटी बताया जाता. तो किसी को बड़े कारोबारी परिवार की सदस्य. तस्वीरें देखकर युवक प्रभावित हो जाते. उन्हें लगता कि रिश्ता सचमुच अच्छा है. लेकिन असलियत में वे सिर्फ डिजिटल भ्रम का हिस्सा बन रहे थे.
हर कॉल के साथ बढ़ता था बिल
एक बार भरोसा बनने के बाद फीस का सिलसिला शुरू होता था. पहले छोटी रकम. फिर बड़ी रकम. फिर और बड़ी रकम. युवक को यह एहसास कराया जाता था कि वह शादी के बेहद करीब पहुंच चुका है. अब पीछे हटना नुकसान होगा. कई मामलों में पीड़ितों ने हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये तक जमा कर दिए. लेकिन रिश्ता कभी घर तक नहीं पहुंचा. बारात कभी नहीं निकली. शादी की तारीख कभी तय नहीं हुई. और जिस दुल्हन से बातचीत होने वाली थी, वह शायद कभी अस्तित्व में ही नहीं थी. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने एक साथ तीन स्थानों पर छापेमारी की. छापे के दौरान जो मिला, उसने जांचकर्ताओं को भी चौंका दिया. कॉल सेंटर का पूरा सेटअप मौजूद था. कई मोबाइल फोन. कंप्यूटर सिस्टम. रजिस्टर. बैंक दस्तावेज. एटीएम कार्ड. क्यूआर कोड और ऐसे कई दस्तावेज जो कथित ठगी के नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे थे. पुलिस ने मुख्य आरोपी रंजीत कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
वकील की भी एंट्री
जांच में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया. पुलिस के अनुसार अमित कुमार नामक व्यक्ति भी इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि वह पेशे से अधिवक्ता है. पुलिस का दावा है कि जब कुछ पीड़ितों ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की तो उन्हें कानूनी सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जाती थी. हालांकि इस मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा. फिलहाल अमित कुमार समेत अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़कियां
छापेमारी के दौरान कुछ युवतियां भी वहां मिलीं. पूछताछ में पता चला कि वे कॉलिंग का काम करती थीं. पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में उनके खिलाफ ठगी में सक्रिय भूमिका के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले. इसलिए आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. हालांकि जांच अभी जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर एक मैट्रिमोनियल संस्था की फ्रेंचाइजी ले रखी थी. इसी के नाम और विश्वसनीयता का उपयोग कर अलग-अलग नामों से वेबसाइट और सेवाएं संचालित की जा रही थीं. परफेक्ट रिश्ता, शादी मैच और शादी मैच इंडिया जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों तक पहुंच बनाई जा रही थी. यही नाम बाद में भरोसे का आधार बनते थे.
हजारों लोग रडार पर
पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक या दो लोगों तक सीमित नहीं था. जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि बीते एक वर्ष में बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क किया गया. अब डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है. संभव है कि आने वाले दिनों में और शिकायतें सामने आएं.