दीपावली रोशनी और खुशियों का त्योहार है. इस बार मेरठ जिला कारागार में भी दीपावली की रौनक दिखाई दे रही है. जेल की चारदीवारी के भीतर बंदी अपने हुनर से त्योहार को खास बनाने में जुटे हैं. महिला बंदी जहां दीये, रंगीन मोमबत्तियां, झालर और रंगोली के पोस्टर तैयार कर रही हैं, वहीं पुरुष बंदी सफाई, बागवानी और अन्य कामों में लगे हैं.
नीला ड्रम कांड यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड में बंद मुस्कान और अमित कश्यप हत्याकांड की दोषी रविता भी दीपावली की तैयारियों में अपना योगदान दे रही हैं. मुस्कान दीये और झालर बनाने के साथ सिलाई-कढ़ाई का काम कर रही है, जबकि रविता बैग तैयार कर रही है. वहीं साहिल और अमरदीप जेल में सफाई और पेड़-पौधों की छंटाई का काम कर रहे हैं.
महिला बंदियां बना रहीं हजारों दीये और मोमबत्तियां
जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को उनकी रुचि और हुनर के मुताबिक काम दिया जा रहा है. महिला बैरक में दीपावली के लिए हजारों दीये, रंगीन मोमबत्तियां और उनकी बातियां तैयार की जा रही हैं. इसके अलावा आकर्षक झालर और रंगोली के पोस्टर भी बनाए जा रहे हैं. जेल के आउटलेट्स पर इन उत्पादों को बिक्री के लिए रखा गया है. इससे महिला बंदियों को रोजगार मिलने के साथ उनके बनाए उत्पादों को बाजार भी मिल रहा है.
जेल की बेकरी में बन रही मेरठ की मशहूर नानखटाई
जेल में चल रही बेकरी भी बंदियों के हुनर का एक बड़ा केंद्र है. यहां करीब 30 तरह के बिस्किट और मेरठ की मशहूर नानखटाई तैयार की जा रही है. इन उत्पादों को विभिन्न आउटलेट्स और सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से बेचने का प्रयास किया जा रहा है. हाल ही में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मेरठ में हुई 18 जिलों के अधिकारियों की बैठक में भी जिला कारागार में तैयार बिस्किट परोसे गए थे.
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल प्रशासन का प्रयास है कि हर बंदी को उसकी रुचि के अनुसार काम दिया जाए, ताकि वह अपनी मेहनत से रोजगार हासिल कर सके. महिला बंदियां दीपावली के लिए दीये, मोमबत्तियां, बातियां और झालर बना रही हैं. इन उत्पादों को जेल के आउटलेट्स पर बिक्री के लिए रखा जाता है. इससे बंदियों को मेहनताना भी मिलता है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं.
ऑस्ट्रेलिया तक भेजे जा चुके हैं जेल में बने फुटबॉल
उन्होंने बताया कि जेल में फुटबॉल बनाने का काम भी होता है. यहां तैयार फुटबॉल पिछले साल ऑस्ट्रेलिया तक भेजी गई थीं. बेकरी में मेरठ की मशहूर नानखटाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जेल प्रशासन का उद्देश्य बंदियों को काम से जोड़कर उनके भीतर हुनर विकसित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है.