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फांसी की सजा सुनते ही फूट-फूटकर रोए मुस्कान और साहिल, फिर जेलर से पूछा ये सवाल

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई गई है. सजा सुनते ही दोनों कोर्ट रूम में फूट-फूटकर रो पड़े. जेलर डॉ. वीरेश राज ने बताया कि दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे और सजा के बाद वो गहरे सदमे में हैं. जेल प्रशासन ने उनकी काउंसलिंग कराई और निगरानी बढ़ा दी है.

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मौत की सजा का सुनकर मुस्कान और साहिल सदमे में हैं.(File Photo- ITG)
मौत की सजा का सुनकर मुस्कान और साहिल सदमे में हैं.(File Photo- ITG)

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुना दी गई है. मेरठ अदालत के मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल बुरी तरह टूट गए और फांसी की सजा सुनते ही कोर्ट रूम में फूट-फूटकर रोने लगे.

मेरठ जेल के जेलर डॉ. वीरेश राज ने बताया कि मुस्कान और साहिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज की कार्यवाही से जुड़े थे. पुलिस अधिकारी की मानें तो सजा सुनाए जाने के बाद दोनों के चेहरे का रंग उड़ गया और दोनों सदमे में चले गए.

जेलर डॉ. वीरेश राज ने बताया कि 30 तारीख को जब उनका दोष सिद्ध पाया गया था, तब ये तो तय हो गया था कि या तो इन्हें आजीवन कारावास मिलेगा या मृत्युदंड. लेकिन, जब सुबह उन्हें पेश किया गया, तो उन्हें कहीं न कहीं ये उम्मीद थी कि सजा उम्रकैद यानी आजीवन कारावास तक ही सीमित रहेगी.

सजा सुनते ही फूट-फूटकर रोए साहिल-मुस्कान

उन्होंने कहा, 'हालांकि शाम को जब न्यायालय ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई, तो ये उनके लिए एक बड़ा झटका था. सजा सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रो पड़े, क्योंकि भारतीय न्याय व्यवस्था में ये सबसे बड़ी सजा है.'

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पुलिस अधिकारी ने बताया कि जेल प्रशासन ने सजा के तुरंत बाद दोनों की काउंसलिंग कराई और डॉक्टरों को भी इस पर नजर रखने के निर्देश दिए. फिलहाल मुस्कान और साहिल गहरे सदमे और परेशानी में हैं, इसलिए बंदी पहरेदारों और सीसीटीवी कैमरों से लगातार उनकी निगरानी की जा रही है.

वहीं, सजा मिलने के बाद दोनों को महिला और पुरुष कैदियों के बैरकों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मुस्कान को उस बैरक में रखा जाएगा जहां बच्चे वाली महिलाएं रहती हैं.

जेलर से मुस्कान ने पूछा अपील को लेकर सवाल

जेल से बाहर आते वक्त और अपनी बैरक में जाने से पहले मुस्कान ने जेलर से एक खास सवाल पूछा. डॉ. वीरेश राज ने बताया, 'उसने मुझसे निकलते वक्त ये कहा कि वो ये समझना चाहती है कि अपील कैसे होती है.'

इस पर जेल प्रशासन ने उसे समझाया कि जैसे ही फैसले की आधिकारिक प्रति मिल जाएगी, उसे पढ़कर पूरी गाइडेंस दी जाएगी. कैदियों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए जेलर ने कहा कि उन्हें बता दिया गया है कि उच्च न्यायालय में इसकी अपील की जाएगी. अगर वो चाहें तो अपने प्राइवेट वकील से अपील करा सकते हैं, वरना जेल प्रशासन का ये कर्तव्य है कि वो स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के जरिए उनकी अपील फाइल करवाएगा.

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मुस्कान और साहिल ने कहा कि वो एक-दो दिन में सोचकर अपना फैसला बताएंगे, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.

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