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यूपी के 12 जिलों में बड़ा एक्शन... 26 इंजीनियरों पर गिरी गाज, 12 हो गए सस्पेंड;जानिए वजह

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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महोबा में भिड़े मंत्री स्वतंत्र देव और विधायक बृजभूषण (Photo: Screengrab)
महोबा में भिड़े मंत्री स्वतंत्र देव और विधायक बृजभूषण (Photo: Screengrab)

यूपी में ‘हर घर नल’ के संकल्प के साथ चल रहे जल जीवन मिशन पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. काम में ढिलाई और शिकायतों की अनदेखी अब भारी पड़ रही है. इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने 12 जिलों में तैनात 26 इंजीनियरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. बाकी के खिलाफ विभागीय जांच, नोटिस और तबादले जैसे कदम उठाए गए हैं. इस कार्रवाई को हाल के समय का सबसे बड़ा प्रशासनिक शिकंजा माना जा रहा है.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह एक्शन उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया, जिनमें जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे. कहीं पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कें नहीं सुधारी गईं, तो कहीं काम अधूरा छोड़ दिया गया. ग्रामीण इलाकों में लोगों को नल से पानी पहुंचाने के लक्ष्य के बीच यह लापरवाही सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई थी.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक अपर मुख्य सचिव (ग्रामीण जल आपूर्ति) अनुराग श्रीवास्तव ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के आदेश जारी किए. उनके निर्देश पर अलग-अलग जिलों में तैनात 12 इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया. निलंबित इंजीनियरों की सूची में अविनाश गुप्ता (लखीमपुर खीरी), सौमित्र श्रीवास्तव (जौनपुर), मोहम्मद कासिम हाशमी (गाजीपुर), अमित राजपूत (चंदौली), सीताराम यादव (चंदौली), अकबर हसन (बिजनौर), अनुराग गोयल (औरैया), कुलदीप कुमार सिंह (हाथरस), राजेंद्र कुमार यादव (आजमगढ़), रूप चंद्र (बरेली), अवनीश प्रताप सिंह (बाराबंकी) और धर्म प्रकाश महेश्वरी (कुशीनगर) शामिल हैं. यही नहीं, चार इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. तीन अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिनसे पूछा गया है कि परियोजनाओं में देरी क्यों हुई. सात इंजीनियरों का तबादला भी किया गया है, ताकि काम की रफ्तार और निगरानी बेहतर हो सके.

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दरअसल, जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है. इसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है. लेकिन जमीनी हकीकत कई जगहों पर इस लक्ष्य से भटकती नजर आई. शिकायतों में यह भी सामने आया कि काम पूरा दिखाकर भुगतान लिया गया, जबकि मौके पर स्थिति कुछ और थी. ऐसे मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. सरकार का साफ संदेश है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

अनुराग श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा है कि मिशन मोड में चल रही इस योजना में ढिलाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. जरूरत पड़ी तो बर्खास्तगी जैसे कठोर कदम भी उठाए जाएंगे. इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा विवाद भी माना जा रहा है, जिसने सरकार का ध्यान खींचा. 30 जनवरी को महोबा के चरखारी में एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया. यहां जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला उस वक्त रुक गया, जब भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने बीच रास्ते में विरोध दर्ज कराया.

विधायक का आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे जनता को परेशानी हो रही है. इस मुद्दे पर दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई, जो बाद में सुर्खियों में आ गई. मामला इतना बढ़ा कि पार्टी स्तर पर भी इसकी समीक्षा हुई.

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