लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने सभी को झकझोर दिया है. इस हादसे के बाद शासन स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सख्ती बढ़ गई है. मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेशभर में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और भीड़भाड़ वाले संस्थानों की जांच शुरू हो चुकी है. इसी कड़ी में बांदा में जो तस्वीर सामने आई, उसने न सिर्फ अधिकारियों को हैरान किया बल्कि पूरे सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
बुधवार को बांदा मंडल के कमिश्नर अजीत सिंह अचानक फील्ड में उतर गए. उनका उद्देश्य था यह देखना कि कागजों में दुरुस्त दिखाई जाने वाली फायर सेफ्टी व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है. लेकिन निरीक्षण के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने कई विभागों की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी. कमिश्नर ने शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया. पहली नजर में सब कुछ व्यवस्थित दिखाई दिया. दीवारों पर अग्निशमन यंत्र टंगे हुए थे, सुरक्षा के बोर्ड भी लगे थे और रिकॉर्ड भी दुरुस्त दिखाए जा रहे थे. लेकिन जब इन उपकरणों की वास्तविक स्थिति जांची गई तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई. कई अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र एक्सपायर मिले. कुछ में गैस नहीं थी तो कुछ में पानी की व्यवस्था ही नहीं थी. कई उपकरण ऐसे मिले जो केवल दिखावे के लिए लगाए गए थे और आपात स्थिति में उनका कोई उपयोग नहीं हो सकता था. निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि अगर किसी अस्पताल में आग लग जाए तो मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? उनके इस सवाल पर मौके पर मौजूद अधिकारी जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखाई दिए.
अग्निशमन विभाग पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जब उपकरण निष्क्रिय थे तो इन संस्थानों को फायर एनओसी कैसे मिल गई. कमिश्नर ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी से जवाब मांगा और व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल और कोचिंग संस्थान वर्षों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से जांच नहीं होती. कई बार निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाता है. कमिश्नर की कार्रवाई के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर नियमित निरीक्षण के बावजूद इतनी बड़ी कमियां कैसे नजरअंदाज होती रहीं.
24 घंटे का अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर अजीत सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन अस्पतालों में फायर सेफ्टी उपकरण निष्क्रिय पाए गए हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर पूरी तरह चालू किया जाए. उन्होंने कहा कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है. उनका सक्रिय और उपयोग योग्य होना जरूरी है. यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियां दूर नहीं की गईं तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समयसीमा पूरी होने के बाद दोबारा निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए.
कोचिंग सेंटरों पर भी सख्ती
लखनऊ हादसे के बाद सबसे अधिक फोकस कोचिंग संस्थानों पर है. बांदा में भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विभिन्न कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई करते हैं. ऐसे में प्रशासन अब कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है. कमिश्नर ने साफ कहा कि बिना सक्रिय फायर सेफ्टी सिस्टम वाले किसी भी कोचिंग सेंटर में पढ़ाई नहीं होगी. जिन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था अधूरी है, उन्हें तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
आने-जाने के रास्तों की भी होगी जांच
निरीक्षण के दौरान केवल अग्निशमन यंत्रों की ही जांच नहीं की गई, बल्कि आपातकालीन निकास मार्ग, सीढ़ियां, पानी की उपलब्धता और बचाव संसाधनों का भी निरीक्षण किया गया. प्रशासन का मानना है कि आग लगने की स्थिति में केवल फायर एक्सटिंग्विशर पर्याप्त नहीं होते. सुरक्षित निकासी मार्ग और आपातकालीन व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. इसी वजह से सभी संस्थानों को अपने एंट्री-एग्जिट सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.
जांच के लिए बनेगी विशेष टीम
कमिश्नर ने बताया कि जल्द ही एक विशेष टीम गठित की जाएगी जो अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों और अन्य भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करेगी. यह टीम सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगी और रिपोर्ट सीधे प्रशासन को सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तय होगी. प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके.
अब सबकी निगाहें अगली कार्रवाई पर
कमिश्नर के निरीक्षण ने जिले के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है. अस्पताल संचालकों और कोचिंग संस्थानों में भी हड़कंप की स्थिति है. कई संस्थानों ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है. सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि 24 घंटे बाद होने वाली समीक्षा में कितनी कमियां दूर मिलती हैं और कितने संस्थानों पर कार्रवाई होती है. फिलहाल इतना तय है कि लखनऊ हादसे के बाद प्रदेश में सुरक्षा मानकों को लेकर जो सख्ती शुरू हुई है, उसका असर अब जिलों में साफ दिखाई देने लगा है. बांदा में कमिश्नर के औचक निरीक्षण ने यह संदेश भी दे दिया है कि सुरक्षा के मामले में अब केवल कागजी इंतजाम नहीं, बल्कि वास्तविक तैयारी की जांच होगी.