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‘मेरा लाल तो चला गया, SIT से तो आएगा नहीं...' लखनऊ अग्निकांड पर छलका निलेश के पिता का दर्द

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 27 वर्षीय नीलेश कुमार की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. पिता शत्रुघ्न लाल ने सरकार को हादसे का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जांच और एसआईटी से उनका बेटा वापस नहीं आएगा. उन्होंने कॉम्प्लेक्स में फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास की कमी पर सवाल उठाए.

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लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले नीलेश के पिता. (Photo: Screengrabs)
लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले नीलेश के पिता. (Photo: Screengrabs)

लखनऊ अग्निकांड में 27 वर्षीय नीलेश कुमार की भी मौत हो गई. वह जब अपने माता-पिता के पैर छूकर घर से नौकरी के लिए निकले थे तो उनके घर वालों को भी नहीं पता था कि वो वापस नहीं लौटेंगे. पिता शत्रुघ्न लाल की आंखों में आंसू हैं और वो सिस्टम को कोस रहे हैं. कह रहे हैं कि मेरे बेटे की मौत की जिम्मेदार सरकार है, अब कार्रवाई करने और एसआईटी बनाने से क्या होगा? मेरा लाल वापस तो नहीं आ जाएगा.

शत्रुघ्न कहते हैं कि मेरा बेटा कितना खुशी-खुशी घर से निकलता था, मैंने नहीं सोचा था कि कल आखिरी बार उसे देख पाऊंगा. कल का वो आखिरी दृश्य अब हमेशा मेरी आंखों के सामने रहेगा. इस घटना के लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार है. सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया जाता है. सरकार को समय-समय पर चेकिंग करना चाहिए. 

नीलेश के पिता ने की ये मांग
सुरक्षा मानकों की जांच करवाना चाहिए और यह पता लगवाना चाहिए कि क्या बिल्डिंग में फायर सुरक्षा है. अगर कभी शॉर्ट सर्किट हो जाए तो बचाव के क्या-क्या उपाय हैं. शत्रुघ्न ने कहा कि कॉम्लेक्स में एग्जिट की व्यवस्था नहीं थी और मौके पर कोई मौजूद नहीं था. अगर समय पर लोग पहुंच जाते तो नीलेश समेत कई अन्य लोगों की जान बच जाती. आरोपियों के खिलाफ सरकार को सख्स कार्रवाई करनी चाहिए. वहीं अग्निकांड में अपने जवान बेटे को खोने पर नीलेश की मां बिलख रही है और नीलेश के शव को देखे जा रही है.

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आपको बता दें कि लखनऊ के जिस अलीगंज इलाके में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, वहां फायर विभाग की टीम मौके पर समय से पहुंच कर भी कुछ नहीं कर पाई. सूचना मिलने के 2 मिनट के अंतराल में ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची. लेकिन धुएं की वजह से फंसे लोगों को निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी. अंदर फायर विभाग की टीम को घुसकर दूसरी मंजिल तक जाने के लिए धुआं निकालना बेहद जरूरी था. जिसके लिए बगल की दीवार तक काटनी पड़ी.

आज तक, उस दीवार तक पहुंचा जहां फायर विभाग की टीम ने चार छेद कर धुआं निकलने का इंतजाम किया और फंसे लोगों को बाहर निकाला. यह दीवार इस कमर्शियल कॉम्पलेक्स के पड़ोस में बने मकान की छत से सटी थी. लिहाजा आनन-फानन में फायर विभाग की टीम पड़ोसी के छत पर गई और वहां 4 जगह पर दीवार में छेद कर दिया, तब जाकर धुआं निकलना शुरू हुआ. 

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