नकली, काउंटरफिट और अधोमानक औषधियों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने व आमजन को उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने दवाओं की विशेष छूट वाली संस्थागत आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने कंपनियों, सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट के स्तर पर होने वाली बिलिंग व दवाओं की वास्तविक आपूर्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है.
विभाग के संज्ञान में आया है कि विभिन्न औषधि निर्माता व विपणनकर्ता कंपनियां अपने सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर अथवा स्टॉकिस्ट के माध्यम से चिकित्सकों और अस्पतालों/नर्सिंग होम को विशेष छूट देती हैं.
कई मामलों में कंपनियां या सीएंडएफ एजेंट दवाओं की बिलिंग संबंधित चिकित्सक या अस्पताल/नर्सिंग होम के नाम पर करने के बजाय अपने स्टॉकिस्ट के नाम पर करते हैं. इसके बाद स्टॉकिस्ट द्वारा बिल में निर्दिष्ट चिकित्सक, अस्पताल अथवा नर्सिंग होम के बजाय किसी अन्य औषधि विक्रेता या फर्म को दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती है.
विशेष छूट वाली दवाओं के डायवर्जन पर रोक
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार विशेष छूट पर प्राप्त दवाओं को अन्य थोक विक्रेताओं की तुलना में कम कीमत पर बेचने से संबंधित स्टॉकिस्ट की बिक्री बढ़ जाती है.
इससे बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इससे भी गंभीर स्थिति तब सामने आती है, जब विशेष छूट अथवा सस्ती दवाओं की आड़ में फर्जी बिल तैयार कर नकली और काउंटरफिट दवाओं की बिक्री की जाती है.
नकली एवं अधोमानक औषधियों के विरुद्ध चलाए गए विभागीय अभियान के दौरान ऐसी गतिविधियां सामने आने का उल्लेख करते हुए विभाग ने इसे नैतिक ट्रेडिंग के विरुद्ध और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक बताया है.
बिल उसी संस्थान के नाम पर होगा, जहां दवा पहुंचनी है
नए निर्देश के तहत कंपनी, सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि दवा की बिलिंग उसी चिकित्सक अथवा संस्थान के नाम से की जाए, जिसे वास्तव में दवा की आपूर्ति की जानी है.
विक्रय बिल में 'बिल टू' और 'शिप्ड टू' के रूप में अलग-अलग परिसरों को अंकित करने की व्यवस्था का दुरुपयोग न हो, यह भी सुनिश्चित करना होगा. यानी बिल जिस चिकित्सक या संस्थान के नाम पर बनाया गया है, आपूर्ति भी उसी निर्धारित स्थान पर की जानी होगी.
संस्थागत आपूर्ति पर पैकिंग में लिखना होगा ‘इंस्टीट्यूशनल सप्लाई’
विशेष छूट पर की जा रही इंस्टीट्यूशनल सप्लाई की दवाओं के डायवर्जन और दुरुपयोग को रोकने के लिए इनके लेबल और पैकिंग पर निर्माणकर्ता फर्म अथवा सीएफए द्वारा स्पष्ट रूप से “इंस्टीट्यूशनल सप्लाई” अंकित किया जाना अनिवार्य होगा. इस व्यवस्था से यह पहचानना आसान होगा कि संबंधित दवा संस्थागत आपूर्ति के लिए है और उसे सामान्य बाजार में अनधिकृत तरीके से डायवर्ट नहीं किया जा सकता.
शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं के लिए लिखित क्रय आदेश अनिवार्य
औषधि नियमावली के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श पर विक्रय की जाने वाली दवाओं- शेड्यूल H, H1 और X की आपूर्ति के संबंध में भी निर्देश स्पष्ट किए गए हैं. इन दवाओं की आपूर्ति पंजीकृत चिकित्सक, अस्पताल, डिस्पेंसरी और नर्सिंग होम को उनके लिखित एवं हस्ताक्षरित क्रय आदेश पर ही की जाएगी. संबंधित क्रय आदेश की प्रति को कम से कम दो वर्ष तक सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी फर्म द्वारा औषधियों की अनधिकृत आपूर्ति किया जाना पाए जाने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उससे संबंधित नियमावली के तहत कार्रवाई के लिए संज्ञान लिया जाएगा.
विभाग ने कहा है कि औषधि एक आवश्यक वस्तु है और ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ), 2013 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1956 के साथ पढ़ते हुए दवाओं की उपलब्धता आमजन के लिए सुलभ रहनी चाहिए. इसी उद्देश्य से विशेष छूट वाली दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता, आपूर्ति की सही पहचान और अनधिकृत डायवर्जन पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है. विभाग ने सभी संबंधित कंपनियों, सीएंडएफ एजेंटों, सुपर डिस्ट्रीब्यूटरों, स्टॉकिस्टों और औषधि विक्रेताओं को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.