देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. उत्तर प्रदेश, असम, उत्तराखंड और बिहार समेत कई राज्यों में नदियां उफान पर हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ ज्यादा बारिश ही बाढ़ की वजह है या बारिश का पैटर्न भी बदल गया है? इसी मुद्दे पर मौसम केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने विस्तार से जानकारी दी.
वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश के मुताबिक, बाढ़ केवल स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश से नहीं आती. बंगाल की खाड़ी से बनने वाले लो प्रेशर सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का स्वरूप बदलता रहता है.
उन्होंने बताया कि जब मानसून ट्रफ उत्तर की ओर, यानी तराई और हिमालयी क्षेत्रों की तरफ खिसक जाती है, तब नेपाल और उत्तराखंड में भारी बारिश होती है. इसका असर नदियों के जलस्तर पर पड़ता है और उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, जब मानसून ट्रफ दक्षिण की ओर चली जाती है तो मध्य प्रदेश समेत मध्य भारत में भारी बारिश होती है, जिसका पानी भी नदियों के जरिए उत्तर प्रदेश तक पहुंचता है. ऐसे में स्थानीय बारिश और बाहरी जलप्रवाह, दोनों मिलकर बाढ़ की स्थिति पैदा करते हैं.
क्लाइमेट चेंज से बदल रहा बारिश का स्वरूप
मोहम्मद दानिश ने कहा कि क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा असर बारिश के पैटर्न पर दिखाई दे रहा है. अब लंबे समय तक बारिश नहीं होती और जब होती है तो बेहद कम समय में अत्यधिक बारिश दर्ज की जाती है.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में यही प्रवृत्ति देखने को मिल रही है. यानी या तो बारिश बिल्कुल नहीं होती, और अगर होती है तो बहुत तीव्र होती है. इसे जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभावों में माना जा सकता है. देखें VIDEO:-
असम में हर साल क्यों आती है बाढ़?
असम में हर साल आने वाली बाढ़ पर वैज्ञानिक ने बताया कि ब्रह्मपुत्र का कैचमेंट एरिया बेहद विशाल है. यह नदी हिमालय और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी अपने साथ लेकर आती है.

उन्होंने कहा कि जब मानसून ट्रफ उत्तर की ओर सक्रिय होती है और पहाड़ी इलाकों में लगातार भारी बारिश होती है, तो ब्रह्मपुत्र के जलग्रहण क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ता है. इसके बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और असम में बाढ़ की स्थिति बन जाती है.
मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में कुछ घंटों की बारिश में क्यों भर जाता है पानी?
मोहम्मद दानिश ने कहा कि मुंबई जैसे तटीय शहरों में लो प्रेशर सिस्टम और मजबूत मानसूनी हवाओं के कारण कम समय में बहुत अधिक नमी पहुंचती है. इससे कुछ ही घंटों में अत्यधिक बारिश हो जाती है और जलभराव की स्थिति बन जाती है.

वहीं, दिल्ली, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में मानसून ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ के आपसी प्रभाव के कारण लगातार कई दिनों तक बारिश होती रहती है. लगातार होने वाली बारिश के कारण जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है और शहरों में पानी भर जाता है.