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10 टीमें, 12 गिरफ्तारियां, फिर भी ओमकार लापता... गाजियाबाद में सड़क पर उतरे ग्रामीण

गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में ओमकार शूटआउट और कथित अपहरण मामले को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. घटना के पांच दिन बाद भी ओमकार का कोई सुराग नहीं मिलने पर परिजन और ग्रामीण धरने पर बैठ गए. धरना स्थल पर पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया.

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ओमकार की बरामदगी न होने पर धरने पर बैठे ग्रामीण.(Photo- ITG)
ओमकार की बरामदगी न होने पर धरने पर बैठे ग्रामीण.(Photo- ITG)

गाजियाबाद के लोनी कोतवाली क्षेत्र में हुए चर्चित ओमकार शूटआउट और कथित अपहरण मामले को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. घटना के पांच दिन बाद भी ओमकार का कोई पता नहीं चलने से परिजन और ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है. इसी के चलते बड़ी संख्या में लोग बंथला-चिरौरी मार्ग पर धरने पर बैठ गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई.

धरने में शामिल लोगों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो ओमकार की बरामदगी हो सकी है और न ही मामले के सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ पाए हैं. इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया. हालांकि इस दौरान माहौल कई बार गरमा गया और पुलिस तथा कुछ लोगों के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

30 मई को हुई थी सनसनीखेज वारदात

जानकारी के मुताबिक, 30 मई को लोनी के खड़खड़ी रेलवे स्टेशन के पास गनौली गांव निवासी ओमकार पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं. हमले में घायल होने के बाद ओमकार को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे इलाके को हिला दिया.

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परिजनों का आरोप है कि गोली लगने से घायल हुए ओमकार को आरोपी जबरन एक कार में डालकर अपने साथ ले गए थे. तभी से उसका कोई पता नहीं चल सका है. परिवार का दावा है कि यह केवल शूटआउट नहीं बल्कि सुनियोजित अपहरण का मामला है.

घटना के बाद से लगातार पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है. इसी वजह से ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है.

धरना स्थल पर पुलिस और ग्रामीणों में बहस

शुक्रवार को धरना स्थल पर पहुंचे गाजियाबाद ग्रामीण क्षेत्र के डीसीपी ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. उन्होंने मामले में अब तक हुई कार्रवाई और चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन की जानकारी लोगों को दी.

इस दौरान कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया.

हालांकि, मौके पर मौजूद वरिष्ठ ग्रामीणों और जिम्मेदार लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाल लिया. इसके बाद धरना शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा और प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें दोहराईं.

10 टीमें जांच में जुटीं, 12 आरोपी जेल भेजे गए

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच को प्राथमिकता पर रखा गया है. आरोपियों की तलाश और ओमकार की बरामदगी के लिए कुल 10 विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं.

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पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान अब तक महिलाओं समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. इसके अलावा मामले के मुख्य आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है.

इसके बावजूद वारदात में शामिल प्रमुख आरोपी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. यही वजह है कि लोगों के बीच पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.

परिजनों का आरोप, सिर्फ आश्वासन दे रही पुलिस

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस लगातार आश्वासन तो दे रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं. परिवार का कहना है कि पांच दिन बीतने के बावजूद ओमकार का कोई सुराग नहीं मिला है.

परिजनों ने साफ कहा है कि जब तक ओमकार की बरामदगी नहीं होती और सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने प्रशासन से जल्द और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है.

वहीं धरने में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा.

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