कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की बेकनगंज थाना पुलिस, एसआईटी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने फर्जी डिग्री और जाली मार्कशीट बनाने वाले एक बड़े गिरोह को रंगे हाथों पकड़ा है. पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ सहित चार आरोपियों को मौके से छापेमारी कर गिरफ्तार किया. आरोपी पिछले 13 वर्षों से अत्याधुनिक तकनीक की मदद से विभिन्न नामी विश्वविद्यालयों की हूबहू नकली डिग्रियां तैयार कर भारत, सऊदी अरब, कनाडा और यूके तक सप्लाई कर रहे थे. पुलिस ने इस पूरे सेटअप को सीज कर दिया है. गिरफ्तार आरोपियों से करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन और हजारों जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं.
लंदन भागने की तैयारी में था मास्टरमाइंड
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का मुख्य सरगना 32 वर्षीय जियाउल हसन ग्राफिक्स डिजाइनिंग का एक्सपर्ट है. वह लंदन के मोबाइल नंबर का उपयोग करके पूरे नेटवर्क को भारत और विदेशों में ऑपरेट कर रहा था. आरोपी जल्द ही ब्रिटेन (यूके) में स्थायी रूप से बसने की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन उससे पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
फिशिंग के जरिए देते थे फर्जी वेरिफिकेशन
यह सिंडिकेट केवल फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज बनाने का काम नहीं करता था, बल्कि सुरक्षा जांच को भी चकमा देता था. जब विदेशों या अन्य जगहों से डिग्री के बैकग्राउंड कंफर्मेशन के लिए फोन आता था, तो ये लोग फिशिंग के जरिए कॉल को खुद अटेंड करके फर्जी वेरिफिकेशन भी दे दिया करते थे. एक नकली डिग्री के बदले ये लोग करीब 10 हजार रुपये वसूलते थे.
देश-विदेश की बड़ी यूनिवर्सिटीज के नाम शामिल
छापेमारी के दौरान मौके से छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएम) कानपुर, उस्मानिया विश्वविद्यालय, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगाया विद्यापीठ, डॉ. डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ, अलगप्पा विश्वविद्यालय और आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय जैसे नामचीन संस्थानों के नाम वाली 800 से अधिक तैयार फर्जी डिग्रियां बरामद की गईं, जिनमें सिर्फ नाम भरना बाकी था.
मैकबुक, प्रिंटर और 141 जाली मोहरें जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक एप्पल मैकबुक प्रो, एक एचपी लैपटॉप, सैमसंग डेस्कटॉप, कैनन कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क और वाई-फाई राउटर सीज किया है. इसके अलावा अलग-अलग विश्वविद्यालयों की 141 जाली मोहरें, 80 स्ट्रिप 3डी मोनोग्राम, 830 ब्लैंक पेपर, 24 डाई और बड़ी संख्या में होलोग्राम भी बरामद किए गए हैं. गिरोह में जियाउल के साथ नूरुद्दीन, हसन आसिफ और आमिर अहमद भी शामिल थे.
खरीदारों की तलाश में जुटी जांच एजेंसियां
आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उनके द्वारा बनाई गई फर्जी डिग्रियों के आधार पर हजारों लोग देश और विदेश में नौकरियां कर रहे हैं. फिलहाल पुलिस इन गिरफ्तार आरोपियों की मदद से उन सभी खरीदारों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने डिग्रियां खरीदीं और इस पूरे सिंडिकेट का हिस्सा बने.