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IIT कानपुर के छात्रों ने निकाली कांवड़ यात्रा, सरसैया घाट से गंगाजल लाकर किया जलाभिषेक

सावन के पवित्र महीने में IIT कानपुर के छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने आस्था और परंपरा की अनोखी मिसाल पेश की. सरसैया घाट से पवित्र गंगाजल लेकर सभी छात्र अनुशासित तरीके से पैदल चलते हुए परमिट स्थित आनंदेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया.

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IIT कानपुर के छात्रों और प्रोफेसरों ने विशेष कांवड़ यात्रा निकाली. (Photo- ITG)
IIT कानपुर के छात्रों और प्रोफेसरों ने विशेष कांवड़ यात्रा निकाली. (Photo- ITG)

IIT कानपुर के छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने सावन में एक विशेष कांवड़ यात्रा निकाली. संस्थान के छात्रों, प्रिंसिपल और तमाम सदस्यों ने सरसैया घाट से पवित्र गंगाजल उठाया और पैदल चलकर परमिट स्थित आनंदेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे. वहां पहुंचकर सभी ने भगवान शिव का पारंपरिक जलाभिषेक किया. आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक सहभागिता का संदेश देने के उद्देश्य से 'बोल बम' के जयकारों के साथ यह कांवड़ यात्रा निकाली गई. जलाभिषेक के बाद महंत बाल योगी अरुण पुरी चैतन्य जी महाराज ने छात्रों को आशीर्वाद दिया.

प्रोफेसरों और छात्रों की बड़ी भागीदारी

इस विशेष सांस्कृतिक आयोजन में प्रोफेसर नचिकेता तिवारी, प्रोफेसर अखिलेश विरमानी, अदिति सक्सेना, आयुषी ओझा और शिवम त्रिवेदी समेत IIT कानपुर के कई अन्य छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए. यात्रा के दौरान अवध बिहारी मिश्रा ने छात्रों को गंगा नदी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरण संबंधी महत्व के बारे में जानकारी दी.

कांवड़ यात्रा को जल संरक्षण अभियान बनाने का सुझाव

प्रोफेसर नचिकेता तिवारी ने छात्रों की इस पहल की सराहना की और इसे आने वाले वर्षों में और बड़े स्तर पर आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में यह पहल केवल पारंपरिक कांवड़ यात्रा तक सीमित न रहकर जल संरक्षण और जल संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने वाले एक व्यापक अभियान का रूप ले सकती है.

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सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है आज की युवा पीढ़ी

छात्र शिवम त्रिवेदी ने कहा कि कांवड़ यात्रा में IITटियन की भागीदारी आज की युवा पीढ़ी के एक अलग पहलू को दर्शाती है. जेन-ज़ी और जेन-अल्फा को केवल सोशल मीडिया और तकनीक के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. युवा आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक विरासत, गंगा और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जुड़े हुए हैं.

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