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बैडमिंटन खेलते समय लगी गोली, एक आंख हो गई खराब, IAS रिंकू सिंह राही ने बताई हमले की कहानी

आईएएस रिंकू सिंह राही की कहानी ईमानदारी की बड़ी कीमत को दिखाती है. घोटाले का खुलासा करने पर उन पर बैडमिंटन खेलते समय हमला हुआ और सात गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी एक आंख चली गई. अब उन्होंने तकनीकी इस्तीफा देकर पीसीएस में लौटने की इच्छा जताई है. उनका कहना है कि काम का मौका नहीं मिला. पहले उनका वीडियो भी विवादों में रहा, जिसके बाद उन्हें राजस्व परिषद भेजा गया, जहां उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई.

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रिंकू सिंह राही अब PCS के तौर पर काम करना चाहते हैं. Photo ITG
रिंकू सिंह राही अब PCS के तौर पर काम करना चाहते हैं. Photo ITG

ईमानदारी की राह पर चलने की कीमत क्या हो सकती है, इसका दर्दनाक उदाहरण आईएएस रिंकू सिंह राही की कहानी में देखने को मिलती है. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा, घोटाले का पर्दाफाश करने के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ, जब वह बैडमिंटन खेल रहे थे. हमलावरों की गोलियों ने उनकी एक आंख छीन ली और उन्हें स्थायी रूप से दिव्यांग बना दिया. अब उन्होंने अपने त्यागपत्र में इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं. रिंकी सिंह को सात गोली मारी गई थी.

आईएएस रिंकू सिंह राही का इस्तीफा इन दिनों चर्चा में है. उन्होंने सामान्य नहीं बल्कि तकनीकी त्यागपत्र दिया है, जिसका मतलब है कि वह अपनी पूर्ववर्ती सेवा यानी पीसीएस में वापस जाना चाहते हैं. अपने 7 पेज के इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि जब उन्हें आईएएस के रूप में काम करने का मौका ही नहीं मिल रहा, तो इस पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है.

जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवाया में एसडीएम के रूप में तैनात रहते हुए रिंकू सिंह उस समय चर्चा में आ गए थे, जब उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक करते दिखे. उन्होंने इस कदम को जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी और अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रेरित करने की कोशिश बताया, लेकिन इस घटना के बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई और 30 जुलाई 2025 को उन्हें राजस्व परिषद से अटैच कर दिया गया.

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'नो वर्क, नो पे' के आधार पर किया काम
राजस्व परिषद में तैनाती के बावजूद करीब दो महीने तक उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई. इससे निराश होकर उन्होंने 29 सितंबर 2025 को 'नो वर्क, नो पे' के आधार पर वेतन न लेने का अनुरोध किया. अपने त्यागपत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने जनहित से जुड़े कार्य करने की पहल की, लेकिन आवश्यक तकनीकी सहयोग उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया.

रिंकू सिंह ने घोटाले का खुलासा किया था
अपने शुरुआती कार्यकाल का जिक्र करते हुए रिंकू सिंह ने बताया कि मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए उन्होंने विभाग में बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा किया था. इस घोटाले में सरकारी योजनाओं का पैसा फर्जी खातों में भेजा जा रहा था. इस मामले को उजागर करने के बाद उन्हें तत्कालीन प्रमुख सचिव की ओर से धमकी दी गई कि यदि उन्होंने ईमानदारी का रास्ता नहीं छोड़ा तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है.

इसके कुछ समय बाद, 26 मार्च 2009 को उन पर जानलेवा हमला हुआ. उस समय वे बैडमिंटन खेल रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर सात गोलियां चलाईं. इस हमले में उनकी एक आंख पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए.

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