प्रयागराज में एक ग्राम प्रधान के लापता होने का मामला पुलिस के लिए चुनौती बना रहा. परिजनों को आशंका थी कि कहीं उनका अपहरण तो नहीं कर लिया गया या उनके साथ कोई अनहोनी तो नहीं हुई. पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया, ड्रोन उड़ाए और डॉग स्क्वाड की मदद से तलाश की. लेकिन जिस ग्राम प्रधान को पुलिस आसपास के इलाकों में खोज रही थी, वह सैकड़ों किलोमीटर दूर वृंदावन पहुंच चुके थे. आखिरकार पुलिस ने उन्हें संत प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम के पास से सकुशल बरामद कर लिया.
मोबाइल पर बात करते हुए निकले, फिर अचानक बंद हो गया फोन
मामला प्रयागराज के थरवई थाना क्षेत्र के मंसैता गांव का है. यहां के ग्राम प्रधान 29 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे मोबाइल पर बात करते हुए घर से निकले थे. इसके बाद वह वापस नहीं लौटे. कुछ समय बाद उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया. परिवार के लोगों ने पहले अपने स्तर पर उनकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो चिंता बढ़ने लगी. 30 अक्टूबर को ग्राम प्रधान के भाई ने थरवई थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी. उन्होंने अपने भाई के अपहरण या किसी अनहोनी की आशंका जताई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
नहर में उतरी एसडीआरएफ, ड्रोन और डॉग स्क्वाड से भी हुई तलाश
ग्राम प्रधान के अचानक गायब होने की सूचना को पुलिस ने गंभीरता से लिया. उनकी तलाश के लिए कई पुलिस टीमें बनीं. संभावित स्थानों पर छानबीन के साथ ही एसडीआरएफ की मदद से मंसैता नहर में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. पुलिस ने ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के इलाकों को भी खंगाला. परिजनों की आशंका और परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस हर संभावित पहलू पर जांच कर रही थी. इस बीच एक ऐसा सुराग मिला, जिसने जांच की दिशा बदल दी.
नया सिम लिया और चाचा को किया फोन, सर्विलांस से खुला राज
पुलिस के मुताबिक लापता ग्राम प्रधान ने इस दौरान नया सिम कार्ड लिया और अपने चाचा को फोन किया. यही फोन पुलिस के लिए अहम सुराग बन गया. सर्विलांस के जरिए पुलिस ने उनकी लोकेशन ट्रेस की तो पता चला कि वह प्रयागराज में नहीं, बल्कि मथुरा के वृंदावन में मौजूद हैं. जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम तत्काल वृंदावन के लिए रवाना हुई. वहां तलाश के दौरान ग्राम प्रधान संत प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम के पास मिल गए. पुलिस ने उन्हें सकुशल बरामद कर लिया और प्रयागराज लेकर आई.
फाफामऊ से लखनऊ, फिर आगरा होते हुए पहुंचे वृंदावन
पूछताछ के दौरान ग्राम प्रधान ने पुलिस को अपने घर से निकलने के बाद का पूरा सफर बताया. उन्होंने कहा कि पारिवारिक कहासुनी और मानसिक तनाव के कारण उन्होंने घर छोड़ दिया था. घर से निकलने के बाद वह पहले फाफामऊ पहुंचे. इसके बाद गोमती एक्सप्रेस से लखनऊ गए और फिर आगरा होते हुए झेलम एक्सप्रेस से वृंदावन पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच में अपहरण या किसी अन्य आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है. जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ग्राम प्रधान को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. फिलहाल ग्राम प्रधान के सकुशल मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली है. जिस मामले में शुरुआत में अपहरण और अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी, उसका खुलासा पारिवारिक विवाद और तनाव के रूप में हुआ.