उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पिता ने ई-रिक्शा खरीदकर परिवार का पेट पालने की चाह में कथित तौर पर अपने ही आठ महीने के बेटे का 1 लाख 80 हजार रुपये में सौदा कर दिया. दो दलालों ने उसकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चे को एक दंपती के हाथों बिकवा दिया. हालांकि, बाद में पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पुलिस से मदद मांगी. पुलिस ने मासूम को सकुशल बरामद कर लिया है.
एसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह के मुताबिक, मंडावली थाना क्षेत्र के कोटावाली गांव निवासी आराम सिंह का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. वह परिवार की आजीविका बेहतर करने के लिए ई-रिक्शा खरीदना चाहता था, ताकि मेहनत-मजदूरी करके घर का खर्च चला सके. इसी दौरान उसका संपर्क श्यामीवाला गांव निवासी शमशेर और खुशनूद से हुआ. आराम सिंह ने दोनों को अपनी आर्थिक स्थिति बताई और ई-रिक्शा खरीदने की इच्छा जाहिर की.
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आरोप है कि दोनों दलालों ने उसकी परेशानी दूर करने के बजाय उसे बच्चे को बेचने का लालच दिया. जब उन्हें पता चला कि आराम सिंह का आठ महीने का बेटा है तो उन्होंने उसे समझाया कि बच्चे के सौदे से मिलने वाली रकम से वह ई-रिक्शा खरीद सकता है और परिवार का पालन-पोषण कर सकता है. कथित तौर पर गरीबी और पैसों के लालच में आकर पिता इसके लिए तैयार हो गया.
छह बेटियों की मां को चाहिए था बेटा, 1.80 लाख में हुआ सौदा
पुलिस के मुताबिक, शमशेर और खुशनूद ने बिजनौर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के खुशहालपुर निवासी देवराज सिंह और उसकी पत्नी सुनीता से संपर्क किया. आरोप है कि दोनों दलालों ने आराम सिंह के आठ महीने के बेटे का सौदा दंपती से 1 लाख 80 हजार रुपये में करा दिया. इस तरह पैसों के बदले मासूम को दूसरे परिवार को सौंप दिया गया.
हालांकि, बच्चे को देने के बाद आराम सिंह परेशान रहने लगा. परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसके इस कदम का विरोध किया और मासूम को वापस लाने का दबाव बनाया. आखिरकार दो दिन पहले उसने पुलिस अधीक्षक के.के. बिश्नोई को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की शिकायत की. उसने आरोप लगाया कि दोनों दलालों ने उसकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चे को बेचने के लिए तैयार किया था.
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने श्यामीवाला गांव से आठ महीने के बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया. इसके बाद बच्चे को खरीदने के आरोपी देवराज सिंह और उसकी पत्नी सुनीता को हिरासत में लिया गया. वहीं, कथित तौर पर सौदा कराने वाले शमशेर और खुशनूद को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
सुनीता ने बताई बच्चे को खरीदने की वजह
पुलिस पूछताछ में सुनीता ने बताया कि उसकी छह बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं था. इसी वजह से उसने दोनों आरोपियों के माध्यम से 1 लाख 80 हजार रुपये देकर बच्चे को खरीदा था. सुनीता के मुताबिक, बच्चा बीमार हो गया था, इसलिए उसे श्यामीवाला में अपनी रिश्तेदारी में छोड़ दिया गया था. उसकी तबीयत ठीक होने के बाद उसे वापस ले जाने की योजना थी. हालांकि, इससे पहले ही पुलिस ने उसे बरामद कर लिया.
आठ महीने का यह मासूम उस उम्र में है, जब उसे माता-पिता की गोद, सुरक्षा और स्नेह की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. उसे यह तक पता नहीं कि उसे पैसों के सौदे का हिस्सा बना दिया गया. इस घटना ने गरीबी और आर्थिक मजबूरी के बीच बच्चों की खरीद-फरोख्त जैसे गंभीर अपराध की भयावह तस्वीर सामने रखी है. साथ ही यह भी सवाल खड़ा किया है कि किसी परिवार की मजबूरी का फायदा उठाकर मासूम की जिंदगी का सौदा कैसे किया जा सकता है.
पुलिस ने इस मामले में दोनों कथित दलालों और बच्चे को खरीदने वाले दंपती समेत चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. सभी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. फिलहाल मासूम पुलिस की कार्रवाई के बाद सकुशल बरामद कर लिया गया है.