
Uttar Pradesh News: आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुए दर्दनाक हत्याकांड के बाद पुलिस ने आरोपी अरविंद की दो अनाथ बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का बड़ा फैसला किया है. एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने दोनों मासूमों को आजीवन गोद लेने का ऐलान किया. पुलिस अधिकारी ने अपनी एक महीने की सैलरी एफडी कराने की बात कही, जबकि आजमगढ़ पुलिस के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने एक दिन का वेतन इन बच्चियों के नाम समर्पित किया है. इस घटना में आरोपी अरविंद, उसकी पत्नी, बेटे और दो पुजारियों की मौत हो चुकी है.
बच्चियों का भविष्य संवारने और काउंसलिंग की पहल
परिवार में अब केवल बुजुर्ग मां और दो बच्चियां (11 महीने और 11 साल) ही बची हैं. 11 साल की बच्ची इस भयानक वारदात की प्रत्यक्ष गवाह रही है, जिसके गहरे मानसिक आघात को देखते हुए पुलिस ने चाइल्ड साइकेट्रिस्ट से काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया है. सरकार की बाल सेवा योजना के तहत दोनों को ढाई-ढाई हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद भी दिलाई जाएगी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम बच्चे को लगी गोली का सच
ऑपरेशन के दौरान बच्चे की मौत पर उठ रहे सवालों पर एसएसपी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए पुलिस का पक्ष रखा. डॉक्टरों के पैनल द्वारा की गई जांच और वीडियोग्राफी से स्पष्ट हुआ कि बच्चे के शरीर पर घाव का साइज 32 बोर की गोली का था. आरोपी अरविंद के पास 32 बोर का लाइसेंसी रिवॉल्वर था, जबकि पुलिसकर्मियों के पास 9 एमएम के हथियार थे, जिससे साबित हुआ कि गोली अरविंद ने चलाई थी.
एटीएस और सरेंडर की कोशिशों के बीच खौफनाक मोड़
पुलिस के मुताबिक, करीब सात-आठ घंटे तक बातचीत कर आरोपी से सरेंडर कराने का प्रयास किया गया था और एटीएस को भी मौके पर तैनात किया गया था. हालांकि, अंदर से गोली चलने की आवाज आने पर पुलिस ने तुरंत दरवाजा तोड़ा. आरोपी ने कमरे में घुसते ही पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में आरोपी अरविंद मारा गया.

18 जिंदा कारतूस और लाइसेंसी असलहे की कहानी
जांच में सामने आया कि आरोपी के पास मौजूद 32 बोर का रिवॉल्वर लाइसेंसी था, जो 2007 में उसके भाई के नाम जारी हुआ था और उसकी मौत के बाद अरविंद को मिला था. पुलिस ने मौके से 18 जिंदा कारतूस बरामद किए. इस पूरी त्रासदी के बाद पुलिस ने दो मासूमों के जीवन को संवारने का जिम्मा उठाया है, ताकि उनका भविष्य अंधेरे में न जाए.