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Exclusive: आमने-सामने घर और आपस में रिश्तेदारी... राम मंदिर चढ़ावे में सेंध लगाने वालों का पैटर्न डिकोड!

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस को बड़ा सुराग मिला है. आठ आरोपियों में से पांच एक-दूसरे के बहुत करीब रहते हैं या रिश्तेदार हैं. इनके घर सिर्फ 100 से 200 मीटर की दूरी पर हैं. लव कुश मिश्रा के घर के पीछे ही अविनाश शुक्ला का घर है, जबकि अनुकल्प मिश्रा का घर करीब 200 मीटर दूर है, जो उन्होंने दो साल पहले खरीदा था.

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पुलिस को पता चला है कि आठ आरोपियों में से पांच या तो एक-दूसरे के पड़ोसी हैं या उनके बीच पारिवारिक संबंध हैं (Photo: PTI)
पुलिस को पता चला है कि आठ आरोपियों में से पांच या तो एक-दूसरे के पड़ोसी हैं या उनके बीच पारिवारिक संबंध हैं (Photo: PTI)

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने पाया है कि इस मामले में पकड़े गए आठ आरोपियों में से पांच आरोपी एक-दूसरे के बहुत करीब रहते हैं या आपस में रिश्तेदार हैं. इनके घर एक-दूसरे से सिर्फ 100 से 200 मीटर की दूरी पर हैं. 

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये सभी आरोपी पहले से एक-दूसरे को जानते थे और क्या इस चोरी को सोच-समझकर एक साजिश के तहत किया गया था.

जांच के दौरान आज तक की टीम ने इन आरोपियों के घरों का खुद जाकर मौके पर रिपोर्टिंग भी की, ताकि यह साफ-साफ दिखाया जा सके कि उनके घर एक-दूसरे से कितने नजदीक हैं.

सबसे पहले लव कुश मिश्रा के घर के बाहर का जायजा लिया गया. उनके घर के ठीक पीछे अविनाश शुक्ला का घर है. यानी दोनों के घर एक-दूसरे से बस कुछ ही कदम की दूरी पर हैं. इसके अलावा एक और आरोपी अनुकल्प मिश्रा का घर भी यहां से करीब 200 मीटर दूर है. खास बात यह है कि अनुकल्प मिश्रा ने यह घर लगभग दो साल पहले खरीदा था.
 

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ये तीनों घर कौशलपुरी कॉलोनी में स्थित हैं. यानी अविनाश शुक्ला, लव कुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा, तीनों एक ही कॉलोनी में और एक-दूसरे के बहुत पास रहते हैं. इतना ही नहीं, इस मामले के दो और आरोपी मनीष यादव और टिन्नू यादव के घर भी एक-दूसरे से सटे हुए हैं.

यह भी पढ़ें: चढ़ावा, चोरी, SIT, FIR से चंपत राय के इस्तीफे तक... अयोध्या केस की पूरी क्रोनोलॉजी

इस तरह कुल मिलाकर देखा जाए तो आठ में से पांच आरोपी ऐसे निकले जो या तो एक ही मोहल्ले में रहते हैं या फिर आपस में परिवार के सदस्य हैं. पुलिस के लिए यह बात बहुत मायने रखती है, क्योंकि इससे यह शक और गहरा हो जाता है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पहले से प्लान करके की गई चोरी हो सकती है.

अब जांच एजेंसियां इस एंगल पर काम कर रही हैं कि क्या इन पांच आरोपियों के बीच पहले से कोई बातचीत होती रही थी, क्या वे किसी एक ही ग्रुप का हिस्सा थे, और क्या मंदिर में दान की रकम चोरी करने का यह तरीका भी मिल-जुलकर तय किया गया था. 

पुलिस अब इनके मोबाइल लोकेशन, आपसी बातचीत और पुराने रिश्तों की भी पड़ताल कर रही है, ताकि पूरी साजिश की तस्वीर साफ हो सके.

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