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Exclusive: CCTV के सामने खड़े होकर चुराते थे नोट, हिडन कैमरे ने बिगाड़ा चढ़ावा चोरों का खेल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच में हिडन कैमरों और पूछताछ से कथित हेराफेरी का तरीका सामने आया है. कैश, जेवरात और वाउचर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं.

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. (Photo: PTI/ITG)
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. (Photo: PTI/ITG)

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित चोरी और गबन के मामले की जांच में अब कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं. शुरुआती जांच के दौरान मिले सबूतों, हिडन कैमरों की फुटेज और पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर चोरी के पूरे तरीके का खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि दानपेटियों से नकदी और जेवरात निकालने, नोटों की गिनती, वाउचर तैयार करने और बैंक में रकम जमा कराने तक की प्रक्रिया में कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की जा रही थी. 

इसी जांच के आधार पर कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और अब पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है. मई महीने के आखिरी हफ्ते में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो सबसे चोरी का शक पैदा हुआ.

दरअसल, एक दान पेटी में 7 से 8 लाख रुपए एक बार में जमा होते थे, लेकिन कुछ सप्ताह के क्रम में 500 की गड्डी में कमी देखी गई. इसके बाद शक गहराया तो नोट गिनने वाले कमरे ने कुछ हिडन कैमरे लगवाए गए. इस हिडन कैमरे की एक हफ्ते की फुटेज देखी गई तो पता चला नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते हैं और दूसरे साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में नोट चोरी कर कपड़ों में छुपा लेते हैं, लेकिन हिडन कैमरे में उनकी यह चोरी पकड़ी गई. मिली जानकारी के मुताबित, यह चोरी एक और तरह से हो रही थी.

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कैमरे में कैद हुआ पूरा सीन

हिडन कैमरे के जरिए देखा गया कि नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते. जब बैंक के पास रकम गिनने की बारी आती तो हर गड्डी की एक-एक नोट को गिनने के बजाए सिर्फ गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता. जब यह रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक में ले जाई जाती, उस दौरान हर गड्डी में जो एक्स्ट्रा नोट लगाए गए थे, वह निकाल दिए जाते. इस तरह वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता और रकम चोरी भी हो रही थी. 

अनुकल्प मिश्रा चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा था और वह यही हेरा-फेरी अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए कर रहा था. मामला सामने आने के बाद लव कुश मिश्रा के ही घर से पुलिस ने करीब 10 लाख रुपए बरामद भी किए थे.

नोट गिनने की प्रक्रिया से जुड़े सभी कर्मचारी किसी न किसी के परिचित थे, किसी न किसी की सिफारिश से काम करते थे. जैसे चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव व्यवस्थापक था, ऐसे में टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगा दिया था. ऐसे ही कई साल से कम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा को लगवा दिया था.

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सीक्रेट तरीकों का इस्तेमाल...

ड्यूटी से वापस जाते वक्त किसी भी कर्मचारी की तलाशी नहीं लेने की लापरवाही का ही नतीजा था कि धीरे-धीरे उस कमरे से ही चोरी करने लगे थे, जहां दान पेटियां खुलती, नोट छांटे जाते और गड्डी बनाई जाती थी.

पुलिस की गिरफ्त में आए अविनाश पांडे सीसीटीवी फुटेज देखा गया और उसके द्वारा जो रकम चोरी की जा रही थी, इस तारीख में बैंक में रकम जमा भी कराई गई है. राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने पूछताछ के दौरान मिलान कराया तो पुष्टि हुई की चढ़ावा चोरी से जमा की गई रकम का एक हिस्सा अविनाश अपने बैंक खाते में जमा कर रहा था. जो श्रद्धालु दानपेटी में जेवरात दान करते थे, उसको भी यह लोग चोरी कर लेते.

बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप राम लाल के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे. सबसे अहम बात यह है कि चोरी पहले करते थे, बाद में नोटों की गिनती या दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा-पढ़ी होती थी.

इसके अलावा, इस मामले में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र ऐसे शख्स हैं, जो बराबर राम मंदिर ट्रस्ट के उस कमरे में आते जाते थे, जहां दान पेटियां खुलती थीं.

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