चाहे इंसान दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न पहुंच जाए, अपनी जन्मभूमि और अपनी मिट्टी से जुड़ाव कभी खत्म नहीं होता. आंध्र प्रदेश के बापटला जिले से ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है. यहां 94 साल की कोंड्रागुंटा महालक्ष्मम्मा ने अपनी सालों पुरानी इच्छा पूरी करने के लिए अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी और दोबारा भारतीय नागरिक बन गईं. उनका कहना था उनकी आखिरी इच्छा है कि उनके जीवन का अंतिम समय उनकी मातृभूमि पर बीते और अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में ही हो.
महालक्ष्मम्मा बापटला जिले के चिंतागुंपाला गांव की रहने वाली हैं. पति के निधन के बाद वह अपने बेटे के साथ अमेरिका चली गई थीं. वहीं रहने के दौरान उन्होंने अमेरिकी नागरिकता भी ले ली थी. हालांकि, विदेश में कई साल बिताने के बाद भी उनका मन हमेशा अपने गांव और देश में ही लगा रहा.
'आखिरी सांस भारत में छूटे, यहीं हो अंतिम संस्कार'
कुछ समय पहले उन्होंने बापटला जिला कलेक्टर को आवेदन देकर भारतीय नागरिकता दोबारा बहाल करने की मांग की थी. अपने आवेदन में उन्होंने लिखा था कि अब उनकी केवल एक ही इच्छा है कि जीवन का आखिरी सांस भारत में छूटे और मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाए.
प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके आवेदन को मंजूरी दी. 24 जून को बापटला कलेक्टरेट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर ने उन्हें निष्ठा की शपथ दिलाई और भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज सौंपे.
भारतीय नागरिकता दोबारा मिलने के बाद महालक्ष्मम्मा की खुशी साफ दिखाई दी. उनके लिए यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का भावनात्मक पल था.
99 की उम्र में अमेरिकी नागरिकता
बता दें कि कुछ साल पहले ऐसा ही एक मामला सामने आया थे लेकिन वह इससे थोड़ा उलट था. साल 2024 में अमेरिका में 99 साल की एक भारतीय महिला को वहां की नागरिकता मिली थी. महिला का नाम दाईबाई थी, जो ऑरलैंडो में अपनी बेटी के साथ रहती हैं. अमेरिका के सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (USCIS) ने उनकी तस्वीर X पर साझा करते हुए लिखा कि उम्र सिर्फ एक संख्या है.
USCIS ने लिखा था कि दाईबाई भारत से हैं और अब अमेरिका की नई नागरिक बन गई हैं. USCIS ने उनकी जो तस्वीर साझा की है, उसमें वो व्हीलचेयर पर बैठकर सिटीजनशिप का सर्टिफिकेट दिखा रही हैं. उनके साथ में उनकी बेटी और निष्ठा की शपथ दिलाने वाले अमेरिकी अधिकारी भी मौजूद थे. USCIS ने दाईबाई को अमेरिकी नागरिक बनने पर बधाई दी थी. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर नई बहस भी छिड़ी. कुछ लोगों ने इसका स्वागत किया, तो कुछ भारतीयों ने आखिरी समय में देश छोड़ने पर नाराजगी जताई.