लखीमपुर खीरी निवासी 30 वर्षीय डॉक्टर सौरभ बाजपेई ने औरैया के तिलक नगर स्थित रामावतार मेमोरियल हॉस्पिटल के स्टाफ और संचालक द्वारा की गई मारपीट और अभद्रता से क्षुब्ध होकर 15 जुलाई को यमुना नदी में छलांग लगा दी. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस, स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया. करीब 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 16 जुलाई को नदी से डॉक्टर का शव बरामद किया गया. पुलिस ने मृतक के परिजनों की लिखित तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी अस्पताल संचालक डॉ. एस.के. सिंह को गिरफ्तार कर लिया है.
सोशल मीडिया पर सुसाइड वीडियो हुआ वायरल
डॉक्टर सौरभ बाजपेई ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था. इस वीडियो में उन्होंने अपनी मौत की वजह का जिक्र करते हुए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने बताया था कि कमरे से शीशा निकालने जैसी छोटी सी बात को लेकर अस्पताल मालिक के जीजा सर्वेश सिंह ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था, जिसके बाद अन्य लोगों ने मिलकर उनकी पिटाई की थी.
पुलिस और थानेदार पर भी उठाए सवाल
मृतक डॉक्टर ने अपने वीडियो में न्याय न मिलने का दर्द भी बयां किया था. उनका आरोप था कि जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने गए, तो थानेदार रामकुमार सिंह ने आरोपियों की जाति का होने के कारण उनकी फरियाद नहीं सुनी और एफआईआर दर्ज नहीं की. डॉक्टर की मौत के बाद पुलिस ने मुकदम दर्ज किया है.
पुलिस अधीक्षक ने दी मामले की जानकारी
औरैया के पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती ने बताया कि 15 जुलाई को कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सर्च ऑपरेशन चलाया गया था. 16 जुलाई को शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया है. पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर रामावतार मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. एस.के. सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
थानेदार पर आरोप
मृतक ने अपने फेसबुक लाइव में बताया कि अस्पताल मालिक डॉक्टर का बहनोई सर्वेश सिंह सर्वेसर्वा है. रूम शिफ्टिंग के दौरान कमरे से शीशा निकालने को लेकर बातचीत में सर्वेश ने सौरभ को थप्पड़ मार दिया. गला दबाया और धमकी भी दी. जब वह थाने में शिकायत दर्ज कराने गया तो दारोगा ने अपने स्वजातियों का पक्ष लिया और समझौता कराने पर जोर दिया.
सौरभ ने अपने सुसाइड वीडियो में कहा है कि थानेदार रामकुमार सिंह भी आरोपियों की तरह ठाकुर थे इसलिए उनकी फरियाद नहीं सुनी गई. एफआईआर नही लिखी गई. हालांकि, सौरभ की मौत के बाद पुलिस ने FIR लिखी है और मुख्यारोपी अस्पताल मालिक को गिरफ्तार किया है.
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