लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड को लेकर सियासत तेज हो गई है. एक तरफ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने KGMU पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की. वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर मौतों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया. मंगलवार को KGMU पहुंचे अखिलेश यादव ने घायलों का हालचाल जाना और हादसे पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों और मानकों का पालन किया गया होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता. उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कई लोगों की जान गई.
अखिलेश यादव ने बताया कि उन्होंने एक गंभीर रूप से घायल युवक से मुलाकात की है, जिसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई है. उनके अनुसार युवक ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगाई थी।.उन्होंने कहा कि युवक का इलाज लंबे समय तक चलेगा और वह अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है. ऐसे में सरकार को उसके पूरी तरह स्वस्थ होने तक वेतन की व्यवस्था करनी चाहिए. सपा प्रमुख ने मांग की कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए और मृतकों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवारों की जिम्मेदारी उठानी चाहिए क्योंकि अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो आखिर कौन करेगा.
अखिलेश और ब्रजेश पाठक आमने-सामने
उधर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि इस दर्दनाक घटना में 15 लोगों की जान गई है और ऐसे समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अलीगंज अग्निकांड अखिलेश सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम है. ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि प्लॉट आवंटन से लेकर भवन निर्माण और नक्शा पास कराने तक की प्रक्रिया अखिलेश सरकार के दौरान हुई थी. उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई होने के बावजूद ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द कर दिया गया था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस दबाव में ऐसा फैसला लिया गया.
लखनऊ अग्निकांड पर सियासत तेज
डिप्टी सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घटना की लगातार निगरानी कर रहे हैं. घटना के बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि वर्ष 2014 में आवासीय नक्शा पास किया गया था. वर्ष 2016 में अवैध निर्माण का मामला दर्ज हुआ और ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी किया गया, लेकिन कुछ समय बाद उसे रद्द कर दिया गया. उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरें भी निर्माण की पूरी प्रक्रिया को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे.