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चल नहीं पाते, फिर भी स्केटिंग में बनाया रिकॉर्ड... शख्स के कारनामे हो रहे वायरल

कमर से नीचे पैरालाइज होने के बावजूद एक शख्स व्हीलचेयर पर बैठे- बैठे आराम से स्केटिंग करता है. इसी तरह वह ऊंचे पहाड़ों पर भी चढ़ जाता है और कई किलोमीटर का सफर व्हीलचेयर से ही तय कर लेता है. इस शख्स के हैरतअंगेज कारनामों के वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं.

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व्हील चेयर पर बैठकर करते हैं कमाल की स्केटिंग (Photo - Facebook/@Xie Junwu)
व्हील चेयर पर बैठकर करते हैं कमाल की स्केटिंग (Photo - Facebook/@Xie Junwu)

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक शख्स का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वह व्हीलचेयर पर बैठकर ऐसे स्केटिंग करते हैं कि देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं. कभी वह तेजी से मुड़ते हैं, तो कभी सड़क पर शानदार अंदाज में स्केटबोर्ड चलाते नजर आते हैं. कमाल की बात यह है कि कमर के नीचे से पैरालाइज होने के बावजूद उन्होंने अपने हुनर के दम पर कई रिकॉर्ड बनाए हैं. चीन के रहने वाले इस शख्स की कहानी किसी को भी हौसला दे सकती है.

इस शख्स का नाम है झी जुनवू. 55 साल के झी चीन के जियांग्शी प्रांत के नानचांग शहर में रहते हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर 'विंड-ब्रेकिंग राइडर' यानी हवा को चीरकर आगे बढ़ने वाला राइडर भी कहा जाता है. उन्होंने अपनी मेहनत से न सिर्फ व्हीलचेयर चलाने में महारत हासिल की, बल्कि अब स्केटबोर्डिंग में भी कमाल कर रहे हैं.

पेड़ से गिरने के बाद बदल गई जिंदगी
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, झी जुनवू की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 19 साल की उम्र में एक हादसे ने उनकी दुनिया बदल दी. वह एक पेड़ से गिर गए, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई. इस चोट के कारण उनके कमर के नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो गया और वह अपने पैरों पर चलने में असमर्थ हो गए.

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हादसे के बाद शुरुआती आठ साल तक झी पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर रहे. घर में ही रहने के कारण उन्हें अपनी आजादी छिन जाने का दर्द भी सताता था. उन्होंने एक वीडियो में अपने उस दौर को याद करते हुए बताया कि शारीरिक दर्द से ज्यादा तकलीफ इस बात की थी कि उन्हें अपना भविष्य नजर नहीं आ रहा था.

साल 2000 में उनकी मां का अचानक निधन हो गया. यह झी के लिए बड़ा झटका था. लेकिन इसी घटना ने उन्हें खुद के पैरों पर खड़े होने के बजाय अपने दम पर जिंदगी जीने का रास्ता तलाशने के लिए मजबूर किया. उन्होंने अपनी मां से किया वादा निभाने और आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया.

एक शख्स को देखकर सीखी व्हीलचेयर चलाने की खास स्किल
साल 2004 में झी किंगदाओ में रीढ़ की हड्डी में चोट से जूझ रहे लोगों की एक बैठक में शामिल हुए. वहां उन्होंने एक शख्स को व्हीलचेयर के अगले पहियों को हवा में उठाकर सिर्फ पिछले पहियों पर संतुलन बनाते देखा. इस करतब ने उन्हें काफी प्रभावित किया.

इसके बाद झी ने इंटरनेट की मदद से व्हीलचेयर चलाने के अलग-अलग तरीके सीखने शुरू किए. धीरे-धीरे उन्होंने पिछले पहियों पर संतुलन बनाने, सीढ़ियां चढ़ने, बास्केटबॉल खेलने और स्ट्रीट डांस जैसी मुश्किल स्किल में भी महारत हासिल कर ली.

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हालांकि, यह सब इतना आसान नहीं था. इन करतबों को सीखने के दौरान उन्हें कई बार गिरना पड़ा. शरीर को व्हीलचेयर से कसकर बांधकर अभ्यास करना पड़ता था. इस दौरान उन्हें चोटें आईं, मोच आई और कई बार शरीर पर नील भी पड़े. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

व्हीलचेयर पर 25.8 किलोमीटर चलकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
झी की मेहनत का नतीजा मई 2012 में देखने को मिला. उन्होंने व्हीलचेयर के पिछले पहियों पर संतुलन बनाकर 25.8 किलोमीटर की दूरी तय की और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इससे पहले यह रिकॉर्ड एक अमेरिकी के नाम था, जिसने इसी तरह 19.96 किलोमीटर की दूरी तय की थी.

झी ने व्हीलचेयर को सिर्फ आने-जाने का जरिया नहीं माना, बल्कि इसे घूमने और नई जगहें देखने का माध्यम भी बनाया. वह चीन के मशहूर माउंट हुआंगशान की करीब 1,800 मीटर ऊंची चोटी तक चार बार पहुंच चुके हैं. अपनी यात्राओं के वीडियो वह सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं, ताकि रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण चलने-फिरने में परेशानी झेल रहे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिल सके.

वह कई मैराथन में हिस्सा लेकर 32 फिनिशर मेडल भी जीत चुके हैं. इनमें न्यूयॉर्क सिटी मैराथन का मेडल उनके लिए खास है. इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से आए लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया था.

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बचपन का सपना पूरा करने के लिए शुरू की स्केटबोर्डिंग
इतनी उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी झी के मन में एक अधूरा सपना था. उन्हें अक्सर स्केटिंग करने के सपने आते थे. यह उनके युवावस्था के दिनों की एक ऐसी याद थी, जिसे वह दोबारा जीना चाहते थे.

आखिरकार, पिछले साल उन्होंने इस सपने को पूरा करने की ठानी. इसके लिए उन्होंने अपने व्हीलचेयर को सुरक्षित तरीके से स्केटबोर्ड से जोड़ने के लिए उसमें बदलाव करवाया और व्हीलचेयर के साथ स्केटबोर्डिंग का अभ्यास शुरू कर दिया.

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धीरे-धीरे वह इसमें भी माहिर होने लगे. अब वह स्केटबोर्ड पर सवार होकर शहर की सड़कों पर तेजी से मुड़ते, फिसलते और संतुलन बनाते नजर आते हैं. उनके इन करतबों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. झी का कहना है कि मेरे हाथ मेरे पैर बन गए और मेरी व्हीलचेयर मेरे जूते बन गई. यह बात उनकी जिंदगी और उनके हौसले को बखूबी बयां करती है.

अब दूसरों को आत्मनिर्भर बनना सिखा रहे हैं झी
आज झी सोशल मीडिया पर 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स रखते हैं. वह जियांग्शी एक्सेसिबिलिटी प्रमोशन कमेटी के डिप्टी डायरेक्टर हैं. इसके अलावा, वह रीढ़ की हड्डी में चोट से जूझ रहे लोगों को दोबारा आत्मनिर्भर बनने में मदद करने के लिए रिहैबिलिटेशन कंसल्टेंट के तौर पर भी काम करते हैं.

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उनकी मदद से चोट से उबर रहे एक व्यक्ति ने रोजमर्रा के काम खुद करना सीख लिया. इसमें पोछा लगाना और किराने का सामान खरीदना जैसे काम भी शामिल हैं.

अब झी चीन में पहली व्हीलचेयर स्केटबोर्डिंग प्रतियोगिता आयोजित करने की योजना बना रहे हैं. उनका मकसद हादसों में घायल हुए लोगों को एक-दूसरे का साथ देने, अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है.झी कहते हैं कि किस्मत ने मुझे व्हीलचेयर दी, लेकिन साथ ही स्केटबोर्ड भी दिया. तूफान को सहन करो, एक दिन इंद्रधनुष जरूर दिखाई देगा.

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झी जुनवू की कहानी बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें आने के बाद भी आगे बढ़ने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं. उन्होंने व्हीलचेयर को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया. आज उनका हुनर उन लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो किसी हादसे के बाद जिंदगी से हार मानने लगते हैं.

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