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नाक में पाइप डालकर पाउडर डालते हैं, फिर कई घंटे नशे में रहते हैं! क्या है ये रापे सेरेमनी

इंटरनेट पर इन दिनों ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोगों के नाम में पाइप डालकर पाउडर की फूंक मारी जा रही है. कुछ लोग इसे नशा तो कुछ समुदाय विशेष का रिचुअल बता रहे हैं. चलिए जानते हैं आखिर ये है क्या, जिसे रापे सेरेमनी बताया जा रहा है.

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रापे सेरेमनी में नाक में पाइप डालकर नशीले पाउडर की फूंक मारी जाती है (Photo - Instagram/@arraialdajuda.trancoso.caraiva)
रापे सेरेमनी में नाक में पाइप डालकर नशीले पाउडर की फूंक मारी जाती है (Photo - Instagram/@arraialdajuda.trancoso.caraiva)

सोशल मीडिया पर आपने ऐसे वीडियो जरूर देखे होंगे, जिनमें कुछ लोग एक खास तरह के पाइप से दूसरे व्यक्ति की नाक में पाउडर डालते दिखाई देते हैं. इसके बाद कई लोगों की आंखों से पानी निकलने लगता है, वे छींकने लगते हैं या उन्हें तेज जलन महसूस होती है. 

इन वीडियो को अक्सर रापे सेरेमनी (Rape Ceremony) से जोड़कर शेयर किया जाता है. दावा किया जाता है कि यह एक प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा है, जिसके जरिए मन को शांत करने और शरीर को शुद्ध करने की कोशिश की जाती है. लेकिन आखिर यह रापे सेरेमनी है क्या? इसमें नाक के जरिए कौन-सा पाउडर दिया जाता है और इसे करने के पीछे क्या मान्यता है?

क्या है रापे सेरेमनी?
रापे को हापे भी कहा जाता है. यह एक पारंपरिक पाउडर है, जिसे दक्षिण अमेरिका के कुछ मूल निवासी समुदाय धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल करते हैं. इसे आमतौर पर तंबाकू और दूसरी पौधों से मिलने वाली सामग्री को पीसकर तैयार किया जाता है. इसकी सामग्री अलग-अलग समुदायों और परंपराओं के हिसाब से बदल सकती है.

इस सेरेमनी में पाउडर को एक खास पाइप की मदद से नाक में पहुंचाया जाता है. इसे देने वाले व्यक्ति को कई परंपराओं में शमन या पारंपरिक उपचारक कहा जाता है. इसके लिए टेपी  नाम का पाइप इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ लोग खुद अपने नथुनों में पाउडर पहुंचाने के लिए कुरिपे नाम के उपकरण का भी इस्तेमाल करते हैं.

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इस परंपरा से जुड़े लोगों का मानना है कि रापे के जरिए मन को शांत करने, ध्यान लगाने और प्रकृति से जुड़ाव महसूस करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, ये आध्यात्मिक मान्यताएं हैं. रापे से शरीर की सफाई, मानसिक उपचार या किसी बीमारी के इलाज का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है.

कैसे होती है रापे सेरेमनी?
रापे सेरेमनी की शुरुआत अक्सर इरादा तय करने यानी इंटेंशन सेटिंग से होती है. इसमें व्यक्ति यह सोचता है कि वह इस अनुभव से क्या समझना या हासिल करना चाहता है. मसलन, वह तनाव से राहत चाहता है, किसी उलझन को समझना चाहता है या अपने मन को शांत करना चाहता है.

इसके बाद कई परंपराओं में कुछ देर शांत बैठने या ध्यान लगाने के लिए कहा जाता है. इसका मकसद मन को स्थिर करना और अपने विचारों पर ध्यान देना होता है.

फिर सेरेमनी कराने वाला व्यक्ति थोड़ी मात्रा में रापे पाउडर लेता है और उसे पाइप में डालता है. इसके बाद पाइप के एक सिरे को पाउडर देने वाला व्यक्ति अपने मुंह से फूंक मारकर दूसरे व्यक्ति की नाक में पाउडर पहुंचाता है. पारंपरिक तरीके में पहले एक नथुने और फिर दूसरे नथुने में पाउडर डाला जा सकता है.

इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले पाउडर की मात्रा और तरीका अलग-अलग हो सकते हैं. हालांकि, इसे पारंपरिक या आध्यात्मिक प्रक्रिया मानने का मतलब यह नहीं है कि यह स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित भी है.

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नाक में पाउडर डालने के बाद क्या होता है?
रापे सेरेमनी के वीडियो में अक्सर लोगों को छींकते, खांसते या आंखों से पानी बहाते देखा जाता है. ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पाउडर नाक की संवेदनशील झिल्ली को परेशान करता है. कुछ लोगों को नाक और चेहरे पर तेज जलन, सिर में दबाव जैसा एहसास या चक्कर भी आ सकते हैं.

कुछ प्रतिभागी इसके बाद शांत महसूस करने या प्रकृति से गहरा जुड़ाव महसूस होने की बात कहते हैं. लेकिन हर व्यक्ति का अनुभव एक जैसा नहीं होता. किसी को बेचैनी हो सकती है, तो किसी को कोई खास आध्यात्मिक अनुभव नहीं होता.

रापे से जुड़ी कुछ परंपराओं में छींकने, नाक बहने या बलगम बाहर निकलने को शरीर और मन की नकारात्मकता बाहर निकालने के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है. मगर यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक व्याख्या है. इससे शरीर के अंदर मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाने का दावा साबित नहीं होता.

क्या रापे सेरेमनी करने वाले कई घंटे नशे में रहते हैं?
रापे सेरेमनी के बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कुछ वीडियो और पोस्ट में इसे ऐसा अनुभव बताया जाता है, जिसके बाद व्यक्ति लंबे समय तक अलग ही अवस्था में रहता है. लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा हो, या हर बार कई घंटे तक नशे जैसी स्थिति बनी रहे, ऐसा कोई पक्का नियम नहीं है.

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रापे में तंबाकू होने पर निकोटीन शरीर में पहुंच सकता है. इससे चक्कर, मितली, उल्टी, पसीना, दिल की धड़कन तेज होना और रक्तचाप में बदलाव जैसे असर हो सकते हैं. अधिक मात्रा में निकोटीन शरीर के लिए खतरनाक भी हो सकता है. इसलिए इसे केवल आध्यात्मिक अनुष्ठान समझकर जोखिम को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.

रापे सेरेमनी के बाद क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को रापे के इस्तेमाल के बाद चक्कर या बेचैनी महसूस हो, तो उसे सुरक्षित जगह पर बैठना या लेटना चाहिए और दोबारा इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. पानी पीना सामान्य हाइड्रेशन के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन इससे निकोटीन का असर खत्म होने या शरीर से सभी विषैले पदार्थ निकल जाने की गारंटी नहीं मिलती.

अगर लगातार उल्टी हो, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, दिल की धड़कन बहुत तेज हो या बेहोशी जैसी स्थिति बने, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.

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रापे सेरेमनी कुछ मूल निवासी समुदायों की पारंपरिक आध्यात्मिक प्रथाओं का हिस्सा है. इसे समझते समय इसकी सांस्कृतिक अहमियत और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों, दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है. सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर अनुभव न तो सबके लिए समान होता है और न ही किसी स्वास्थ्य लाभ का प्रमाण.

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