अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय युवक ने इसी दूरी को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी का ऐसा इस्तेमाल किया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है. उन्होंने अपनी मां के घर में एक पुराना लैपटॉप और बड़ी स्क्रीन लगाकर उसे 24 घंटे चलने वाली वीडियो कॉल से जोड़ दिया.इस अनोखे सेटअप की कहानी हर्ष सावरगांवकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है.
मां से दूर जाना सबसे मुश्किल लगा
हर्ष ने अपनी पोस्ट में बताया कि इस बार काम के लिए मां को छोड़कर जाना उनके लिए काफी मुश्किल था. इसके बाद उन्होंने घर की डाइनिंग टेबल पर एक पुराना लिनक्स लैपटॉप और बड़ी स्क्रीन लगा दी.यह लैपटॉप लगातार वीडियो कॉल पर रहता है. यानी अमेरिका में हर्ष जहां भी हों, घर में उनकी मां के सामने स्क्रीन पर उनका चेहरा दिखाई दे सकता है.
खास बात यह है कि इसका मकसद पूरे दिन बातचीत करना नहीं है.
हर्ष के मुताबिक, दोनों जरूरी नहीं कि लगातार एक-दूसरे से बात करें. कई बार मां अपने काम में व्यस्त रहती हैं और हर्ष भी अपना काम करते रहते हैं. लेकिन बीच-बीच में मां स्क्रीन की तरफ देखती हैं तो उन्हें बेटा दिखाई देता है और हर्ष भी अपनी मां को देख सकते हैं.
एआई ने संभाला वीडियो कॉल का 'टेक्निकल काम'
इस जुगाड़ का सबसे दिलचस्प हिस्सा एआई का इस्तेमाल है. हर्ष ने बताया कि उन्होंने एआई टूल क्लॉड की मदद से ऐसी स्क्रिप्ट तैयार कराईं, जो वीडियो कॉल में आने वाली कुछ तकनीकी परेशानियों से निपटने में मदद करती हैं.
मसलन, अगर लैपटॉप या ब्राउजर क्रैश हो जाए तो सिस्टम दोबारा कॉल से जुड़ने की कोशिश करता है. अगर वाई-फाई कनेक्शन चला जाए तो भी दोबारा कनेक्शन स्थापित करने की कोशिश की जाती है.अगर लैपटॉप बंद हो जाए तो उनकी मां को सिर्फ पावर बटन दबाना है, जिसके बाद वह दोबारा कनेक्शन शुरू कर सकती हैं.
यानी हर्ष ने सिर्फ वीडियो कॉल शुरू नहीं की, बल्कि उसे ज्यादा से ज्यादा अपने आप चलते रहने वाला सिस्टम बनाने की कोशिश की.
रात 3 बजे मां उठीं तो स्क्रीन पर दिखा बेटा
हर्ष ने इस सेटअप से जुड़ा एक बेहद भावुक पल भी साझा किया.उन्होंने बताया कि अगर उनकी मां रात करीब 3 बजे पानी पीने के लिए उठती हैं, तो स्क्रीन पर उन्हें बेटा काम करता हुआ दिखाई दे सकता है. वह कुछ देर के लिए स्क्रीन की तरफ देखकर उसे 'हाय' कह सकती हैं और फिर वापस सोने जा सकती हैं. यही छोटी सी बात इस पूरी कहानी को सिर्फ टेक्नोलॉजी के प्रयोग से आगे ले जाती है.हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद मां और बेटे को ऐसा एहसास होता है कि वे एक ही जगह पर हैं.
'हम बात भी नहीं कर रहे होते, फिर भी...'
हर्ष ने अपनी पोस्ट में बताया कि दोनों पूरे दिन बात नहीं कर रहे होते. लेकिन जब भी उनकी नजर स्क्रीन पर जाती है, वे एक-दूसरे को देख सकते हैं. उनके मुताबिक, वह कहीं बाहर काम कर रहे होते हैं और उनकी मां घर पर अपना काम कर रही होती हैं. दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, लेकिन स्क्रीन दोनों के बीच एक तरह की मौजूदगी बनाए रखती है.उन्होंने इस अनुभव को शेयर करते हुए लिखा- 'थैंक यू, टेक्नोलॉजी.'
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- 'ये खूबसूरत है'
हर्ष की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस आइडिया की तारीफ की. कई लोगों ने इसे परिवार से दूर रहने वाले लोगों के लिए दिल छू लेने वाला तरीका बताया.कुछ यूजर्स ने यह भी पूछा कि क्या उन्होंने इस पूरे सेटअप का कोड या स्क्रिप्ट सार्वजनिक की है, ताकि दूसरे लोग भी इसे आजमा सकें. एक यूजर ने इसे बेहद खूबसूरत आइडिया बताया और कहा कि दूसरे देश में अकेले रहने के बावजूद परिवार से जुड़े रहने की यह कोशिश खास है.
वहीं, कुछ लोगों ने सवाल भी उठाया कि इसके लिए इतना जटिल सेटअप क्यों, जबकि सीसीटीवी या बेबी कैम जैसे आसान विकल्प भी मौजूद हैं.
फिर भी इस कहानी की खासियत तकनीकी जुगाड़ से ज्यादा उस भावना में है, जिसके चलते हर्ष ने यह सिस्टम तैयार किया- दूर रहकर भी मां की रोजमर्रा की जिंदगी में खुद को थोड़ा करीब महसूस करना.
यह कहानी मूल रूप से हर्ष सावरगांवकर की सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है. उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है.