किसी छोटे बच्चे की हंसी, बिल्ली का उछलना या पपी की शरारत देखकर अक्सर हमारे मुंह से निकलता है- कितना क्यूट है! लेकिन आज की युवा पीढ़ी के लिए क्यूट होने का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है. उनके लिए किसी का प्यार जताना, छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना और किसी खास की याद दिलाने वाला मैसेज भेजना भी क्यूट है.
डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक नए सर्वे में सामने आया है कि Gen Z के बीच 'क्यूट' शब्द के मायने बदल रहे हैं. अब इसे सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि खुशी, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
आखिर क्यूट होने का मतलब क्या है?
इस सर्वे में 2,000 वयस्कों को शामिल किया गया. इसमें 55 फीसदी Gen Z ने माना कि पिछले 10 सालों में 'क्यूट' शब्द का मतलब बदल गया है. इनमें 37 फीसदी लोग इसे अपनी भावनाओं से जोड़ते हैं, जबकि 25 फीसदी के लिए किसी का ख्याल रखना और दूसरों के प्रति संवेदनशील होना भी क्यूट होने का हिस्सा है.
यानी अब किसी चीज या इंसान का सिर्फ देखने में अच्छा होना ही काफी नहीं है. वह आपको कैसा महसूस कराता है, यह बात भी मायने रखती है. किसी की छोटी-सी कोशिश अगर आपके चेहरे पर मुस्कान ला दे या आपको खास महसूस कराए, तो वह भी आपके लिए क्यूट हो सकती है.
पुरानी और नई पीढ़ी की सोच में कितना अंतर?
सर्वे के मुताबिक, बेबी बूमर्स यानी पुरानी पीढ़ी के लोग क्यूट शब्द को ज्यादातर किसी चीज के प्यारे दिखने से जोड़ते हैं. इनमें 80 फीसदी लोगों ने क्यूट को देखने में मनमोहक लगने वाली चीजों से जोड़ा. वहीं, 78 फीसदी के लिए पपी और बिल्ली के बच्चे क्यूट हैं, जबकि 63 फीसदी लोगों को खिलखिलाता बच्चा प्यारा लगता है.
दूसरी तरफ, Gen Z और मिलेनियल्स के लिए क्यूट होने के मायने कुछ अलग हैं. इनमें 34 फीसदी लोग ऐसी चीजों को क्यूट मानते हैं, जो उन्हें खुशी देती हैं. बेबी बूमर्स में ऐसा सोचने वालों की हिस्सेदारी सिर्फ 13 फीसदी है.
इसी तरह, 33 फीसदी युवा किसी के ख्याल रखने और दूसरों के प्रति संवेदनशील होने को भी क्यूट मानते हैं. पुरानी पीढ़ी में ऐसा मानने वाले सिर्फ 10 फीसदी हैं. वहीं, किसी दूसरे इंसान से भावनात्मक जुड़ाव को क्यूट मानने वाले युवाओं की हिस्सेदारी 18 फीसदी है, जबकि बेबी बूमर्स में यह आंकड़ा महज 5 फीसदी है.
प्यार भरे छोटे इशारे भी हैं क्यूट
सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई. 45 साल से कम उम्र के लोगों के लिए प्यार जताने वाले छोटे-छोटे इशारे काफी मायने रखते हैं. Gen Z और मिलेनियल्स में 46 फीसदी लोगों ने माना कि किसी का प्यार भरा व्यवहार उन्हें क्यूट लगता है. वहीं, 62 से 80 साल की उम्र के लोगों में ऐसा मानने वालों की हिस्सेदारी सिर्फ 12 फीसदी रही.
इसके अलावा, किसी दोस्त का ऐसा मैसेज भेजना जो उसे आपकी याद दिलाए, युवाओं को खासा पसंद आता है. Gen Z और मिलेनियल्स में 36 फीसदी लोगों ने इसे क्यूट माना, जबकि पुरानी पीढ़ी में यह आंकड़ा 11 फीसदी रहा.
इसी तरह, हाथ से लिखा हुआ नोट युवाओं के लिए खास है. 32 फीसदी युवाओं ने इसे क्यूट माना, जबकि बेबी बूमर्स में ऐसा सोचने वाले सिर्फ 8 फीसदी थे. वहीं, किसी का प्यार से वॉइस मैसेज भेजना 30 फीसदी युवाओं को क्यूट लगता है. पुरानी पीढ़ी में ऐसा मानने वाले केवल 8 फीसदी रहे.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि आज की युवा पीढ़ी के लिए किसी रिश्ते में छोटी-छोटी कोशिशें और अपनापन दिखाना काफी अहम है. महंगे तोहफे या बड़ी-बड़ी बातें ही नहीं, बल्कि किसी का आपको याद करना और आपका ख्याल रखना भी रिश्ते को खास बना सकता है.
क्यूट चीजें खुशी देने का भी जरिया
सर्वे में शामिल लोगों ने यह भी बताया कि क्यूट और दिल को सुकून देने वाले पल उनकी जिंदगी में कितने अहम हैं. 82 फीसदी लोगों ने माना कि ऐसे पल उन्हें आसानी से खुशी दे सकते हैं. वहीं, 77 फीसदी लोगों का कहना था कि ये रोजमर्रा के सामान्य दिनों को भी बेहतर बना देते हैं.
करीब 69 फीसदी लोगों ने माना कि मुश्किल वक्त में ऐसे पल उन्हें सुकून देते हैं. वहीं, 44 फीसदी लोगों ने कहा कि पांच साल पहले के मुकाबले अब उनके लिए ऐसे छोटे-छोटे खुशनुमा पलों की अहमियत बढ़ गई है.
सर्वे में एक और बात सामने आई. 84 फीसदी लोग अपनी पसंद की क्यूट चीजों को खुलकर पसंद करने में सहज महसूस करते हैं. उन्हें इस बात की चिंता नहीं होती कि ऐसा करने पर कोई उन्हें बचकाना समझेगा.
इसके अलावा, 41 फीसदी लोगों का मानना है कि अगर समाज में दयालुता और प्यार जताने के तरीके ज्यादा खुलकर सामने आएं, तो दुनिया बेहतर हो सकती है. लोग बिना झिझक अपना प्यार, अपनापन और चंचल स्वभाव जाहिर कर सकें, तो रिश्तों में भी गर्मजोशी बढ़ सकती है.
जापनी कंपनी ने क्यों कराया यह सर्वे?
यह रिसर्च जापानी कंपनी सैनरियो ने कराई है, जो हैलो किटी जैसे मशहूर किरदारों के लिए जानी जाती है. कंपनी ने पेरिस में अपने 'बियांड क्यूट' कार्यक्रम के मौके पर यह सर्वे कराया. इसका मकसद यह समझना था कि नई पीढ़ी के लिए क्यूट होने का मतलब कैसे बदल रहा है और किस तरह पुरानी यादें, डिजिटल कल्चर और साझा अनुभव लोगों को एक-दूसरे के करीब ला रहे हैं.
सैनरियो से जुड़ी वेलबीइंग एक्सपर्ट और चार्टर्ड साइकोलॉजिस्ट सूजी रीडिंग के मुताबिक, क्यूट चीजों को पसंद करने का मतलब सिर्फ उनका अच्छा दिखना नहीं है. असल बात यह है कि वे हमें कैसा महसूस कराती हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में खुशी देने वाली छोटी-छोटी चीजों, दयालुता और भावनात्मक जुड़ाव के लिए जगह बनाना हमारी खुशहाली के लिए भी फायदेमंद हो सकता है.
सैनरियो के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कोसुके हमासाकी ने भी कहा कि कंपनी यह समझना चाहती थी कि नई पीढ़ी के लिए क्यूट होने का मतलब कैसे बदल रहा है और यह किस तरह लोगों के बीच जुड़ाव का जरिया बन रहा है.