महीने में 80 हजार रुपये किराया आए और करीब 80 लाख रुपये के दो फ्लैट हों, तो शायद ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी चुनना पसंद करेंगे. लेकिन दिल्ली के एक उबर ड्राइवर की कहानी कुछ अलग है. दावा है कि दो फ्लैट से अच्छी-खासी कमाई होने के बावजूद वह रोजाना करीब 12 घंटे कैब चलाता है और महीने के लगभग 50 हजार रुपये अलग से कमाता है. इसके पीछे की वजह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी घटना है, जिसने उसे खुद को साबित करने के लिए प्रेरित किया.
दिल्ली के इस उबर ड्राइवर की कहानी आस्था सेठ नाम की एक महिला ने इंस्टाग्राम पर शेयर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि कैब राइड के दौरान उनकी ड्राइवर से करीब पांच मिनट बातचीत हुई. इस छोटी सी बातचीत में ड्राइवर ने अपनी जिंदगी के बारे में जो बताया, उसने उन्हें काफी प्रभावित किया.
हार्ट अटैक के बाद बदल गई जिंदगी
आस्था सेठ के मुताबिक, ड्राइवर मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है. वह दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार की फैक्ट्री में काम करता था और वहां अच्छी कमाई कर रहा था. लेकिन पिछले साल हार्ट अटैक आने के बाद उसकी जिंदगी अचानक बदल गई.
दावा है कि हार्ट अटैक से उबरने के बाद वह पहले की तरह शारीरिक मेहनत वाला काम नहीं कर सकता था. ऐसे समय में मदद मिलने के बजाय कथित तौर पर उससे कहा गया कि अब वह 'किसी काम का नहीं' रहा. इसके बाद उसे फैक्ट्री छोड़नी पड़ी.
इस घटना के बाद उसने हार मानने के बजाय अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया. उसने उबर ड्राइवर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया.
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दो फ्लैट से आता है 80 हजार रुपये किराया
आस्था के मुताबिक, ड्राइवर के पास नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास एक रिहायशी सोसाइटी में दो फ्लैट हैं. दोनों फ्लैट की कुल कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई गई है. इन प्रॉपर्टीज से उसे हर महीने लगभग 80 हजार रुपये किराया मिलता है.
इतनी आमदनी होने के बावजूद ड्राइवर घर पर बैठकर आराम नहीं करता. पोस्ट के मुताबिक, वह सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक उबर चलाता है और इससे हर महीने करीब 50 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई करता है.
ऐसे में किराए और कैब चलाने से उसकी कुल मासिक आमदनी करीब 1.30 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. हालांकि, ये सभी आंकड़े सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं.
पैसे के लिए नहीं, खुद को साबित करने के लिए करता है काम
आस्था ने अपनी पोस्ट में बताया कि ड्राइवर के पास काम छोड़कर घर पर आराम करने का विकल्प है. इसके बावजूद उसने काम करते रहने का फैसला किया. इसके पीछे उसका मकसद उन लोगों को यह दिखाना है, जिन्होंने हार्ट अटैक के बाद उसे कमजोर और बेकार समझ लिया था.आस्था ने लिखा कि वह उबर ड्राइवर के तौर पर इसलिए काम करना चुनता है, ताकि यह साबित कर सके कि हार्ट अटैक आने से कोई इंसान बेकार या कमजोर नहीं हो जाता.
बेटियों के लिए बचाकर रखे हैं दोनों फ्लैट
पोस्ट के मुताबिक, ड्राइवर ने अपने दोनों फ्लैट अपनी दो बेटियों के भविष्य के लिए बचाकर रखे हैं. इसके अलावा बिहार में उसकी पुश्तैनी संपत्ति भी बताई गई है.
आस्था के मुताबिक, ड्राइवर के साथ महज पांच मिनट की बातचीत ने उन्हें जिंदगी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने इस शख्स की कहानी को उन लोगों के लिए प्रेरणा बताया, जो मुश्किल परिस्थितियों में हार मानने के बारे में सोचने लगते हैं.
सोशल मीडिया पर भी यह कहानी लोगों का ध्यान खींच रही है. कई यूजर्स ने ड्राइवर के जज्बे की तारीफ की. एक यूजर ने लिखा, 'आगे बढ़ते रहिए अंकल.' वहीं, दूसरे ने उन्हें 'असली हीरो' बताया.
दिल्ली के इस उबर ड्राइवर की कहानी सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है. लेकिन अगर ये दावे सही हैं, तो उसकी कहानी सिर्फ पैसे कमाने की नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त के बाद दोबारा खड़े होने और खुद को साबित करने के जज्बे की कहानी है.