आज इंटरनेट, मोबाइल फोन, वीडियो कॉलिंग और मैसेजिंग ऐप के जमाने में हाथ से चिट्ठी लिखकर भेजना किसी पुराने जमाने की भूली- बिसरी कहानी की तरह लगता है. लेकिन, एक समय जब संचाल के इतने साधन नहीं थे. तब दूर देश में रहने वाले अपनों से जुड़ने का सबसे बड़ा जरिया चिट्ठी ही थी. किसी जमाने में दूसरों के लिए चिट्ठी लिखना एक पेशा था. कुछ लोगों ने पीढ़ी दर पीढ़ी चिट्ठी लिखने के काम को ही करियर बना लिया था. चीन में भी ऐसी ही परंपरा था. आज यहां हम ऐसे ही एक प्रोफेशनल लेटर राइटर की कहानी लेकर आए हैं.
आज जब चिट्ठी लिखना और भेजना बीते दिनों की बात हो गई है. लेटर राइटिंग का जमाना भी लद चुका है. ऐसे में चीन में एक शख्स इन दिनों चर्चा में हैं, जिन्हें वहां का अंतिम प्रोफेशनल लेटर राइटर कहा जा रहा है. उस शख्स ने पिछले 59 साल में दूसरों के लिए करीब 1 लाख से ज्यादा चिट्ठियां लिखी.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपूर्वी चीन में रहने वाले 77 साल के एक व्यक्ति ने लगभग छह दशकों तक लोगों के अपने घर की याद, कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को शब्दों में बयां कर समुद्र पार भेजे जाने वाले चिट्ठियों में तब्दील किया है.
फ़ुजियान प्रांत के क्वानझोउ के रहने वाले जियांग मिंगडियन को चीन के अंतिम एक्टिव पेशेवर पत्र लेखकों में से एक माने जाते हैं, हालांकि कोई भी सार्वजनिक व्यक्ति यह नहीं बताता कि अभी भी कितने लोग इस पेशे को अपनाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 59 वर्षों से अधिक समय में उन्होंने स्थानीय परिवारों की ओर से विदेशों में रहने वाले उनके रिश्तेदारों को 100,000 से अधिक पत्र लिखे हैं, जो फिलीपींस, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित कई देशों तक पहुंचे हैं.
उन्होंने अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से 18 वर्ष की उम्र में इस पेशे में कदम रखा. उनके पिता चीन के शुरुआती पेशेवर पत्र लेखकों में से एक थे, जबकि उनकी मां एक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका थीं. मां ने ही उन्हें शुरुआती शिक्षा दी थी. दूसरों के लिए चिट्ठी लिखने का यह पेशा, फुजियान के लंबे समय से चले आ रहे प्रवासन की वजह से उत्पन्न हुआ था.
1840 के दशक से, युद्ध और गरीबी से विवश होकर बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश में प्रांत छोड़कर चले गए. वे घर पत्र और पैसे भेजते थे, लेकिन बोली और निरक्षरता के कारण कई रिश्तेदार उसे पढ़ नहीं पाते थे या उसका जवाब नहीं दे पाते थे. इसी खाई को पाटने के लिए प्रोफेशनल लेटर राइटर सामने आए.
साइकिल से गांव- गांव जाकर चिट्ठी पढ़ते और उसका जवाब लिखते
जियांग के काम में अक्सर स्थानीय बोलियों को परिष्कृत लिखित चीनी भाषा में बदलना शामिल होता था, जबकि पतों का आमतौर पर विदेशी भाषाओं में सावधानीपूर्वक और सटीक अनुवाद करना पड़ता था. उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में ही खुद से भाषाएं सीखना शुरू कर दिया था. टेप और डिक्शनरी का इस्तेमाल करके अंग्रेजी, जर्मन, स्पेनिश और वियतनामी सहित अन्य भाषाएं सीखीं.
अपने शुरुआती वर्षों में, जियांग साइकिल से एक गांव से दूसरे गांव जाते थे. प्रवासी चीनी लोगों के परिवारों के लिए पत्र पढ़ते और जवाब लिखते थे. बाद में उन्होंने शहर में सड़क किनारे एक छोटा सा स्टॉल लगाया. ऐसे समय में जब नियमित नौकरियों में लगे जियांग के दोस्त प्रति माह 12 युआन कमाते थे, जियांग दूसरों के लिए चिट्ठी लिखकर प्रतिदिन दो युआन कमाते थे. यह आय उसे अपने तीन बेटों का पालन-पोषण करने में मदद करती थी.
जियांग के लिए, एक अच्छा पत्र केवल अनुवाद का मामला नहीं था. इसमें भावना, परिस्थिति और माहौल को उसी हिसाब से बताना आवश्यक होता था. उन्होंने फुजियान टेलीविजन को बताया कि विदेश जाने वाले कई चीनी प्रवासियों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. जब रिश्तेदार अधिक वित्तीय सहायता मांगते थे, तो जियांग उनकी शिकायतों को नरम कर देता था और बीमारी या अन्य पारिवारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए चालाकी से चिट्ठियों में अनुरोध करता था.
दिल छू लेगी कुछ चिट्ठियों की कहानियां
जिन कहानियों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया, उनमें से एक उन पत्नियों की कहानी थी जिन्हें स्थानीय रूप से फांके शेन के नाम से जाना जाता था. जिनके पति दक्षिण पूर्व एशिया चले गए थे जबकि वे परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए पीछे रह गई थीं. जियांग ने एक ऐसी महिला को याद किया जिसने 14 साल की उम्र में शादी की, 15 साल की उम्र में बच्चे को जन्म दिया और अपने पति की विदेश में मृत्यु के बाद 96 साल की उम्र तक विधवा रही.
एक अन्य महिला, जो वर्षों के अकेलेपन से थक चुकी थी, अक्सर अपने अनुपस्थित पति के बारे में शिकायत करती थी, लेकिन जियांग ने उसकी शिकायतों को कविताओं में ढालकर समुद्र पार भेज दिया. इन फांके शेन के लिए , पूरा जीवन कुछ ही अक्षरों में खत्म हो सकता था.
20वीं सदी तक वह ऐसी महिलाओं को विदेशों में अपने पतियों के साथ फिर से मिलने के लिए प्रोत्साहित करता था. मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के आने से संचार के तरीके में आए बदलाव के चलते जियांग के ग्राहकों की संख्या लगातार घटती चली गई. कई बुजुर्ग नियमित ग्राहक अब इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन उन्हें इस बात से तसल्ली मिलती है कि कुछ लोग आज भी प्यार, तड़प और अफसोस जताने के लिए हाथ से लिखे शब्दों का सहारा लेते हैं.
अब युवा शौकिया चिट्ठी लिखवाने आते हैं...
2025 से, जब से उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना काम शेयर करना शुरू किया है, तो आज के युवा भी उनसे अपने लिए पत्र लिखवाने के लिए उनके पास आने लगे. हालांकि इनमें से अधिकांश चिट्ठियां कभी भेजे नहीं जाते, बल्कि याद या तोहफे के तौर पर दिए जाते हैं. जियांग ने डैक्सियांग न्यूज को बताया कि मुझे युवाओं को चीनी प्रवासन इतिहास के बारे में बताने में खुशी होती है.
क्वानझोऊ चीन के उन प्रसिद्ध शहरों में से एक है जहां प्रवासी चीनी लोगों के पैतृक घर हैं. बताया जाता है कि इस शहर से जुड़े 1 करोड़ से अधिक लोग 170 से अधिक देशों और क्षेत्रों में फैले हुए हैं. कियाओपी के नाम से जाने जाने वाले , विदेशों में रहने वाले चीनी लोगों द्वारा घर भेजे गए पत्र और धन को 2013 में यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया गया था. इन्हें चीनी अंतरराष्ट्रीय प्रवासन इतिहास के दुर्लभ प्रमाण के रूप में मान्यता प्राप्त है.
1927 के एक पत्र में केवल एक ही चीनी अक्षर - 'नान' लिखा है , जिसका अर्थ है "कठिनाई". वहीं 1957 में लिखे गए एक अन्य पत्र में 3,000 से अधिक अक्षर हैं.