क्या आपको लगता है कि अगर किसी इंसान के पास 10 या 11 करोड़ रुपये की संपत्ति हो जाए, तो वह आराम से नौकरी छोड़कर जिंदगी का आनंद ले सकता है? शायद ज्यादातर लोगों का जवाब 'हां' होगा. लेकिन हाल ही में सामने आई एक कहानी ने लोगों की इस सोच को बदल दिया है. 48 साल के एक टेक प्रोफेशनल ने बताया कि उसने मेहनत और समझदारी से निवेश करके करीब 11 करोड़ रुपये की संपत्ति बना ली है. इसके बावजूद वह नौकरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. उसकी सबसे बड़ी चिंता पैसे की कमी नहीं, बल्कि भविष्य की चिंता है.
उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी कहानी शेयर करते हुए लिखा कि आज के समय में कोई भी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. टेक इंडस्ट्री में लगातार छंटनी हो रही है. कंपनियां अचानक कर्मचारियों को निकाल रही हैं. ऐसे माहौल में उसे लगता है कि सिर्फ पैसा होना ही काफी नहीं है, मानसिक रूप से भी रिटायरमेंट के लिए तैयार होना जरूरी है. उस व्यक्ति की सालाना सैलरी करीब 55 लाख रुपये है. उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनमें एक 11वीं कक्षा में पढ़ता है और दूसरा तीसरी कक्षा में. बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतें और भविष्य की जिम्मेदारियां अभी भी उसके सामने हैं. इसलिए वह नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं लेना चाहता.
इतनी सेविंग के पास भी लग रहा डर
अगर उसकी संपत्ति की बात करें तो उसने अपना पैसा कई जगह निवेश किया है. उसके पास लगभग 4.5 करोड़ रुपये के स्टॉक्स हैं. करीब 70 लाख रुपये EPF में जमा हैं. लगभग 1.1 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए हैं. इसके अलावा करीब 6.5 करोड़ रुपये की निवेश वाली रियल एस्टेट प्रॉपर्टी भी है. हालांकि उस पर करीब 1.8 करोड़ रुपये का होम लोन भी चल रहा है. इतनी बड़ी संपत्ति होने के बावजूद उसका कहना है कि वह आर्थिक रूप से तो काफी हद तक स्वतंत्र है, लेकिन मानसिक रूप से अभी रिटायरमेंट के लिए तैयार नहीं है. उसे लगता है कि नौकरी सिर्फ कमाई का जरिया नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को एक उद्देश्य भी देती है.
उसकी पोस्ट पर हजारों लोगों ने अपनी राय दी. कई लोगों ने कहा कि अगर उनके पास 11 करोड़ रुपये होते तो वे तुरंत नौकरी छोड़ देते. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि आज के समय में बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई, इलाज का खर्च और भविष्य की चिंता को देखते हुए उसका फैसला गलत नहीं है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि रिटायरमेंट का मतलब हमेशा काम छोड़ देना नहीं होता. अगर आर्थिक स्थिति अच्छी है, तो इंसान अपनी पसंद का काम कर सकता है, कम तनाव वाली नौकरी चुन सकता है या फिर अपना कोई छोटा बिजनेस शुरू कर सकता है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, लोगों ने क्या कहा?
फाइनेंसियल एक्सपर्ट भी अक्सर कहते हैं कि रिटायरमेंट का फैसला सिर्फ बैंक बैलेंस देखकर नहीं लेना चाहिए. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी मासिक जरूरतें क्या हैं, भविष्य में खर्च कितना बढ़ सकता है, स्वास्थ्य पर कितना पैसा लग सकता है और आप किस तरह की जिंदगी जीना चाहते हैं. इस कहानी से सबसे बड़ा सबक यही मिलता है कि केवल करोड़ों रुपये जमा कर लेना ही आर्थिक आजादी नहीं है. असली आर्थिक आजादी तब होती है जब आपके पास भविष्य की चिंता कम हो और आप अपने फैसले बिना डर के ले सकें.
आज के दौर में नौकरी की गारंटी पहले जैसी नहीं रही. इसलिए सिर्फ अच्छी सैलरी पर निर्भर रहने के बजाय बचत, निवेश और लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी है. साथ ही यह भी समझना चाहिए कि रिटायरमेंट सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि मानसिक तैयारी का भी फैसला होता है. इसलिए करोड़ों की संपत्ति होने के बाद भी कुछ लोग नौकरी जारी रखना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें सुरक्षा का एहसास केवल बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि अपने काम से भी मिलता है.